Khushboo kumari Teacher: बिहार के बांका जिले के सरकारी स्कूल की टीचर खुशबू कुमारी (khushboo Kumari) को 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (National Teachers Award) से सम्मानित किया जाएगा. शिक्षा के फील्ड में परिवर्तन लाने और सरकारी स्कूल में क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए उन्हें ये सम्मान दिया जा रहा है. खुशबू कुमारी उन चुनिंदा शिक्षकों में से एक हैं, जिन्होंने पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा बल्कि बच्चों के लिए इसे रोचक बनाया.
झूमते-गाते बच्चे करते हैं पढ़ाई
खुशबू कुमारी जब 2 का टेबल बच्चों को पढ़ाती हैं तो पूरा क्लास झूमने लगता है. मात्रा का उच्चारण बताती हैं तो उनके साथ-साथ बच्चे भी गाने लगते हैं. वो डंडा का इस्तेमाल तो करती हैं लेकिन बच्चों को पीटने या डराने के लिए नहीं बल्कि क, ख याद कराने के लिए.
हर बच्चा है अनमोल: खुशबू कुमारी
खुशबू कुमारी मानती हैं कि बच्चों का किसी पाठ को याद करने से ज्यादा जरूरी है कि उनके अंदर आत्मविश्वास की भावना आए कि वो ये कर सकते हैं. कोई बच्चा कमजोर नहीं होता है. केवल उसे वो माहौल नहीं मिलता कि वो बेझिझक सिख सके. वो कहती हैं कि हाथ की सभी उंगलियां एक जैसी नहीं होती फिर भी सभी जरूरी होती हैं. ठीक वैसे ही माता-पिता के लिए सभी बच्चे अनमोल होते हैं.
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खुद के बनाए TLM से बच्चों को पढ़ाती हैं
खुशबू कुमारी बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखकर नहीं पढ़ाती हैं, बल्कि पढ़ाई को मजेदार और रोचक बनाती हैं. वे 13 साल से सरकारी शिक्षक के रूप में काम कर रही हैं और इस दौरान उन्होंने खुद के बनाए TLM यानी कि चार्ट, फ्लैशकार्ड, मॉडल और दूसरे शिक्षण सामग्री से बच्चों को पढ़ाया है.
खुशबू जिन-जिन कक्षाओं में क्लास लेती थीं, उस क्लास का परफॉरमेंस और अटेंडेंस में सुधार आता गया. पिछले 13 वर्षों से अधिक की अपनी इस जर्नी में खुशबू ने केवल सिलेबस पूरा करने पर फोकस नहीं किया बल्कि बच्चों के पूरे ग्रोथ पर ध्यान दिया.
कौन हैं टीचर खुशबू कुमारी?
खुशबू बिहार की रहने वाली हैं. वे फिलहाल बांका नगर परिषद के उर्दू प्राथमिक विद्यालय, बिदायदीह में प्रधान शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं. इस बार के शिक्षक सम्मान कार्यक्रम के लिए उनका नाम बिहार से चुना गया है. खुशबू सिर्फ एक टीचर नहीं हैं वो काउंसिलर, बच्चों की दोस्त और उनकी रक्षक भी हैं. उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ गुड टच, बैड टच सिखाया. किसी बच्चे को अगर उसके माता स्कूल नहीं आने देते हैं तो खुशबू कुमारी माता-पिता से बात करती हैं, उनकी काउंसलिंग करती हैं.
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