JEE Main Success Story: आजकल सभी एग्जाम में आंसर की जारी किया जाता है. इस आंसर पर अगर ऑब्जेक्शन हो तो स्टूडेंट्स बताते हैं और फिर इसे सही करके फाइनल आंसर की जारी किया जाता है. अब सोचिए अगर आंसर की करेक्शन किसी को टॉपर बना दे. हां, गुरुग्राम के रहने वाले कबीर चिल्लर (Kabir Chillar) के साथ ऐसा ही हुआ है.
कबीर चिल्लर को मिले 300 में से 300 अंक
कबीर छिल्लर को प्रोविजनल आंसर की के आधार पर 300 में से 295 अंक मिले थे. लेकिन उन्हें यकीन था कि आंसर की में करेक्शन होने पर उनके मार्क्स बढ़ेंगे और हुआ भी ऐसा ही. आंसर की में करेक्शन होने पर कबीर को पूरे 100 पर्सेंटाइल मिले. कबीर की दो सालों की मेहनत फाइनली रंंग लाई.
परिवार से मिली प्रेरणा
कबीर ऐसे परिवार से आते हैं जहां शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी गई. उनके पिता ने IIT Kharagpur से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech किया है. वे एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं. कबीर की मां स्कूल शिक्षिका हैं. ऐसे में कबीर के घर में हमेशा से शिक्षा का माहौल था.
IIT Bombay का है गोल
एक इंटरव्यू में कबीर ने बताया कि उनका पहला लक्ष्य IIT Bombay से बीटेक करना है. हालांकि, वे यहीं रुकने वाले नहीं हैं. इसके बाद वे अमेरिका के कैम्ब्रिज स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में पढ़ाई करना चाहते हैं.
कोटा बना टर्निंग प्वॉइंट
कबीर दो सालों से कोटा में रहकर तैयारी कर रहे थे. कोटा उनके लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. कबीर ने तीनों सब्जेक्ट फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स की एक समान पढ़ाई की. कबीर रात करीब 1 बजे सोते थे और सुबह 6 बजे उठ जाते थे. हालांकि उनका पढ़ाई का समय तय नहीं था, लेकिन वे नियमित अभ्यास और निरंतरता पर भरोसा करते थे. बीच-बीच में माइंड को रिलैक्स करने के लिए दोस्तों और परिवार से बात करते थे. कबीर हमेशा से पढ़ने में अच्छे थे. उन्होंने 10वीं क्लास में 98 प्रतिशत हासिल किया था.
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