Success Story: असम के नलबाड़ी जिले के रहने वाले गौरव बैश्य की कहानी हर NEET स्टूडेंट के लिए मोटिवेशन से भरी है. आर्थिक तंगी और मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपनों को जिंदा रखा. घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने अखबार बेचने का काम किया और साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी. बिना किसी बड़ी कोचिंग के, सिर्फ मेहनत और सेल्फ स्टडी के दम पर उन्होंने NEET परीक्षा पास कर डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया. उनकी यह जर्नी बताती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती.
पिता की मदद के लिए बेचा अखबार
गौरव के पिता गुवाहाटी में निजी सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे. कोरोना के कारण उनकी नौकरी पर संकट आया और परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया. ऐसे में गौरव ने 2020 में 19 साल की उम्र में अखबार बेचने का काम शुरू कर दिया.
गौरव ने बताया कि उनके पिता की कम आय से घर का खर्च, पढ़ाई और राशन चलाना मुश्किल हो रहा था. उनके पास खेती के लिए जमीन भी नहीं थी, इसलिए हर जरूरत की चीज खरीदनी पड़ती थी. ऐसे में 2020 के आखिर में जब हालात थोड़े सामान्य हुए, तो उन्होंने अखबार बांटने का काम शुरू कर दिया और इसे कभी बोझ नहीं माना.
सेल्फ स्टडी के दम पर हासिल की सफलता
घर की हालत चाहे जैसी भी हो गौरव अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटके. उन्होंने कम रिसोर्स में भी पढ़ाई जारी रखी. अपने मेहनत और सेल्फ स्टडी के दम पर साल 2023 में 65% अंकों के साथ 12वीं पास की और इसके बाद NEET की तैयारी शुरू की. गौरव ने Youtube की मदद से पढ़ाई की और NCERT के कॉन्सेप्ट को मजबूत किया.
लगातार मेहनत के बाद उन्होंने NEET UG परीक्षा पास कर ली और नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हासिल किया. उनकी कहानी सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते.
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