एक मलाल और सीख ली 9 भाषा, जानिए कौन हैं Sonam Wangchuk, प्रकृित से है खास प्रेम

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक का जन्म लेह में हुआ था. बचपन में जब गांव में स्कूल नहीं था तो उनकी मां ने उन्हें 9 सालों तक मातृभाषा में पढ़ना लिखना सीखाया. उन्होंने NIT से पढ़ाई की है. उन्होंने शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में कई ऐसे काम किए हैं, जिसकी काफी चर्चा है. आइए, जानते हैं सोनम वांगचुक कौन हैं.

Sonam Wangchuk: आप सभी ने 2009 में आमिर खान की बॉलीवुड फिल्म 3 Idiots तो देखी ही होगी. इस फिल्म का किरदार फुंसुक वांगड़ू रियल लाइफ के एक व्यक्ति से प्रभावित था और वो व्यक्ति हैं सोनम वांगचुक. सोनम वांगचुक लद्दाख के रहने वाले हैं और उन्होंने NIT से पढ़ाई की है. वे सामाजिक कार्यों में अपनी रूचि के लिए जाने जाते हैं. आइए, विस्तार से जानते हैं कि कौन हैं सोनम वांगचुक की सफलता की कहानी (Success Story)–  

NIT से हासिल की बीटेक की डिग्री 

सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लेह में हुआ था. बचपन में जब गांव में स्कूल नहीं था तो उनकी मां ने उन्हें 9 सालों तक मातृभाषा में पढ़ना लिखना सीखाया. बाद के वर्षों में उन्होंने NIT श्रीनगर से बीटेक की डिग्री हासिल की. 

हमेशा से ही सोनम वांगचुक की रूचि सामाजिक कार्यों में थी. वो बीटेक में पढ़ाई करने के दौरान ही वहां के स्थानीय बच्चों को पढ़ाते थे. इस दौरान उन्हें सरकारी शिक्षा में कमियों का पता चला. इसके बाद उन्होंने इसमें सुधार के लिए ऑपरेशन न्यू होप शुरू किया. फिर 1988 में शैक्षिक सांस्कृतिक आंदोलन एसईसीएमओएल शुरू किया.

पर्यावरण का विशेष ध्यान 

सोनम वांगचुक एक प्रकृति प्रेमी भी हैं. उन्होंने पहाड़ी इलाकों में पर्यावरण के अनुकूल घर डिजायन किया. उन्होंने अपना घर बनाने के लिए स्थानीय मिट्टी, पत्थर और लकड़ी का इस्तेमाल किया. वे शिक्षा के क्षेत्र और सामाजिक कार्य में नए प्रयास के लिए जाने जाते हैं. 2018 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 

एक दो नहीं 9 भाषाओं के हैं जानकार 

सोनम वांगचुक 9 भाषाओं के जानकार हैं. अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि बचपन में उन्हें अन्य भाषाएं नहीं आती थीं, जिसका मलाल उन्हें था. यही कारण है कि उन्होंने बड़े होने के साथ कई सारी भाषाएं सीखें. आज के समय में वे करीब 9 भाषाओं को अच्छे से बोल और समझ सकते हैं. 

मातृ भाषा से है गहरा लगाव 

सोनम की शुरुआती पढ़ाई उन्होंने अपनी मातृ भाषा में की. ऐसे में वे मातृभाषा में सीखने को काफी प्रोत्साहित करते हैं. यही कारण है कि उन्होंने विज्ञान और गणित जैसे विषयों को भी लद्दाखी भाषा में पढ़ाने की मुहिम भी शुरू की.

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