भारत का वो इकलौता राज्य, जहां 200 साल में भी अंग्रेज नहीं जमा सके कब्जा!

Goa History In Hindi: भारत का एक ऐसा राज्य जो अपने पर्यटन स्थल के लिए जाना जाता है. यहां 450 सालों तक पुर्तगाली शासक ने राज किया. लेकिन कभी भी अंग्रेज इस राज्य को गुलाम नहीं बना पाए.

Goa History In Hindi: आज भारत एक स्वतंत्र देश है. एक ऐसा समय भी था जब भारत अंग्रेजों का गुलाम हुआ करता था. हालांकि, भारत का एक राज्य ऐसा है जो कभी गुलाम नहीं बना. आज इस राज्य में लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं. यहां के बीच (Beach) काफी सुंदर और आकर्षित करने वाले हैं.

भारत का ये राज्य कभी नहीं बना गुलाम

भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ था. लेकिन भारत का एक राज्य ऐसा है जो ब्रिटिश शासन से हमेशा से आजाद ही था. हम बात कर रहे हैं गोवा के बारे में. गोवा पर लगभग 450 वर्षों तक पुर्तगालियों का शासन रहा, इसलिए यहां ब्रिटिश हुकूमत स्थापित नहीं हो सकी.

पशुराम की धरती कहलाता था ये राज्य

गोवा का इतिहास काफी पुराना है. आज भले ही यहां ईसाई धर्म के लोग रहते हैं. लेकिन पुरानी कथाओं के अनुसार, गोवा को भगवान परशुराम की भूमि माना जाता है. समय के साथ यहां विभिन्न राजवंशों का शासन रहा जैसे कि शिलाहार, कदंब, बहमनी, आदिलशाह. लेकिन 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली व्यापारियों ने यहां कदम रखा और धीरे-धीरे अपना शासन स्थापित कर लिया.

450 साल गुलाम रहा गोवा

गोवा भारत की आजादी के बाद भी गुलाम रहा. पुर्तगाली शासन इस राज्य पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाह रहे थे. गोवा पर 450 साल तक पुर्तगालियों ने शासन किया. ऐसे में 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत कार्रवाई कर गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया. इसके बाद गोवा को भारत में शामिल किया गया. पहले यह केंद्र शासित प्रदेश बना और 30 मई 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला.

टूरिस्ट के बीच गजब का क्रेज

गोवा अपने समुद्र तटों, चर्च और कल्चर के लिए फेमस है. गोवा की राजधानी पणजी अपनी नाइट लाइफ, कैसीनो और तरह-तरह के फेस्ट के लिए फेमस है. यहां पर शानदार सीफूड मिलते हैं. यहां कई सारे हिस्टॉरिकल स्पॉट भी हैं. गोवा का मार्केट भी बोहेमियन (Boho) ड्रेस और स्टाइलिश ऑर्नामेंट के लिए भी जाना जाता है.

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लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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