Jharkhand Education Big Step: झारखंड के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए अच्छी खबर है. राज्य के प्राइवेट स्कूलों में अब संताली भाषा की पढ़ाई शुरू होने जा रही है. सीबीएसई (CBSE) जोनल ऑफिस रांची के निर्देश पर इसकी शुरुआत हो रही है.
राजधानी रांची का दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS Ranchi) राज्य का ऐसा पहला प्राइवेट स्कूल बन गया है, जिसने अपने यहां संताली भाषा का कोर्स शुरू करने का फैसला किया है.
Santali in Jharkhand Schools: कक्षा 6 से होगी शुरुआत
- नए शैक्षणिक सेशन 2026–27 से यह नई व्यवस्था लागू होगी.
- डीपीएस रांची में कक्षा 6 के छात्रों को संताली भाषा पढ़ने का विकल्प मिलेगा.
- स्कूल प्रबंधन ने संताली भाषा पढ़ने के इच्छुक छात्रों की जानकारी अभिभावकों से मांगी है.
- पूरी जानकारी जुटाकर तय समय सीमा में सीबीएसई को भेजी जाएगी.
R-1, R-2 और R-3 के तहत मिलेगा ऑप्शन
सीबीएसई के त्रि-भाषा फॉर्मूले (Three-Language Formula) के तहत छात्रों को 3 स्तरों पर भाषा चुनने की छूट होती है. छात्र अपनी पसंद के अनुसार संताली भाषा चुन सकेंगे -
- पहली भाषा (R-1): प्राथमिक या मुख्य भाषा के तौर पर.
- दूसरी भाषा (R-2): अनिवार्य द्वितीय भाषा के तौर पर (जैसे हिंदी-अंग्रेजी के साथ).
- तीसरी भाषा (R-3): अतिरिक्त या क्षेत्रीय भाषा के तौर पर (जैसे संस्कृत या अन्य 3rd Language की जगह).
यानी छात्र संताली को पहली, दूसरी या तीसरी - किसी भी भाषा के विकल्प के रूप में चुन सकते हैं.
स्कूलों में होगी संताली शिक्षकों की नियुक्ति
निजी स्कूलों में संताली भाषा पढ़ाने के लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. डीपीएस की प्राचार्या सह सीबीएसई सिटी को-ऑर्डिनेटर डॉ जया चौहान ने बताया कि इसका उद्देश्य सिर्फ एक नया विषय जोड़ना नहीं है, बल्कि बच्चों को बहुभाषिक दक्षता और अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है.
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9 विशेषज्ञों की टीम ने तैयार की पाठ्य पुस्तक
डीपीएस रांची परिसर में संताली भाषा की पढ़ाई के लिए विशेष कमेटी बनाई गई थी. विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के 9 विशेषज्ञों ने मिलकर इसकी किताब तैयार की है.
कमेटी में शामिल प्रमुख विशेषज्ञ-
- ठाकुर प्रसाद मुर्मू (सहायक प्रोफेसर, संताली विभाग, सिदो-कान्हू बिरसा विवि, पुरुलिया)
- डॉ. सुशील टुडू (सहायक प्रोफेसर, पीजी संताली विभाग, सिदो कान्हू मुर्मू विवि, दुमका)
- डॉ. शर्मिला सोरेन (सहायक प्रोफेसर, पीजी संताली विभाग, एसकेएम विवि, दुमका)
- संतोष मुर्मू (सहायक प्रोफेसर, संताली विभाग, डीएसपीएमयू, रांची)
- अमूल ऑगस्टिन हेम्ब्रम (सहायक शिक्षक, पाकुड़)
- उलिसन मुर्मू (सहायक शिक्षक, दुमका)
- सिल्वेस्टर सोरेन (विज्ञान शिक्षक, दुमका)
- प्राची दीक्षित (एसोसिएट प्रोफेसर व अतिरिक्त निदेशक, सीबीएसई)
- डॉ. जया चौहान (प्राचार्या, डीपीएस स्कूल)
झारखंड के प्राइवेट स्कूलों में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा को जगह मिलना एक बड़ा बदलाव है. डीपीएस रांची की इस पहल के बाद आने वाले दिनों में राज्य के अन्य प्राइवेट स्कूलों में भी संताली भाषा की पढ़ाई शुरू होने का रास्ता साफ होगा.
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