राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर जो धरना शुरू हुआ, उसकी वजह बिल्कुल साफ थी. NEET UG 2026 का पेपर लीक और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग में गड़बड़ी. सोचिए, लाखों बच्चे साल-साल भर तैयारी करते हैं, कोचिंग में लाखों रुपये खर्च होते हैं और फिर पता चलता है कि पेपर लीक हो गया या मार्किंग में गड़बड़ है. तो गुस्सा आना लाजमी है. लेकिन NEET UG से शुरू हुआ ये आंदोलन राजनीति का रूप कैसे ले लिया? देखकर ऐसा लगा हो जैसे NEET के पेपर में पॉलिटिकल साइंस के सवाल आ गए.
| तारीख | घटना |
| 3 मई 2026 | पेपर लीक का दावा सामने आया |
| 5–11 मई | देशभर में छात्र प्रदर्शन |
| 12 मई | परीक्षा रद्द, CBI जांच |
| 20 जून | CJP का जंतर-मंतर धरना शुरू |
| 21 जून | NEET-UG री-एग्जाम |
| 28 जून | सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल |
NEET UG में पेपर लीक की घटना के बाद छात्रों के गुस्से को आवाज दी "कॉकरोच जनता पार्टी" (CJP) नाम के एक व्यंग्यात्मक युवा समूह ने. इसके साथ SFI, AISA और AISF जैसी कई छात्र संगठन भी जुड़ गए. मांग बिल्कुल साफ थी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए.
सोनम वांगचुक की इंट्री
शुरुआत में प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था. छात्र थाली-चम्मच बजाकर विरोध कर रहे थे. पूरा फोकस सिर्फ एजुकेशन और परीक्षा सुधार पर था. कुछ दिनों बाद लद्दाख के मशहूर इंजीनियर, साइंटिस्ट, शिक्षा-सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की इंट्री होती है. सोनम वांगचुक कई बार भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण मार्च के जरिए अपनी मांगे सरकार तक पहुंचाते रहे हैं.
"मैं कोई हीरो नहीं हूं. मैं बस एक जिम्मेदार नागरिक होने का अपना फर्ज निभा रहा हूं. आप भी ऐसा कर सकते हैं. दूसरों में हीरो ढूंढना बंद कीजिए. अपनी जिंदगी की कहानी के हीरो खुद बनिए." - सोनम वांगचुक
कौन हैं सोनम वांगचुक?
ऐसा कहा जाता है कि आमिर खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 3 इडियट्स का लीड रोल "फुंसुक वांगड़ू" सोनम वागंचुक के जीवन से ही प्रेरित है. हालांकि, एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट में आमिर खान ने इसे फेक दावा बताया है. उन्होंने कहा कि यह किरदार काल्पनिक है किसी के जीवन पर आधारित नहीं है.
छात्रों को दिखी न्याय की उम्मीद
NEET UG पेपर लीक के खिलाफ 28 जून 2026 को सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल दिल्ली के जंतर मंतर पर शुरू हुआ. देशभर के स्टूडेंट्स सोनम वांगचुक के साथ इमोशनली कनेक्ट हो गए और जंतर मंतर पर आना शुरू कर दिया. छात्रों को उनके इस कदम से न्याय की एक उम्मीद नजर आने लगी.
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कॉक्रोच जनता पार्टी की मांगें
जंतर-मंतर पर धरना शुरू होने से पहले ही CJP ने अपनी मांगें जारी की थीं-
- परीक्षा व्यवस्था में सुधार
- जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई
- छात्रों के हितों की रक्षा
- प्रभावित उम्मीदवारों को मुआवजा देना
जंतर मंतर बना आंदोलनों का महाकुंभ
जुलाई में संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही जंतर-मंतर अचानक कई आंदोलनों का केंद्र बन गया. कई अलग-अलग प्रदर्शन भी वहीं शुरू हो गए. इनमें देश के कई बड़े चेहरे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते नजर आए, जिनमें कुछ नाम नीचे टेबल में देख सकते हैं-
| कौन जुड़ा? | मुद्दा | कनेक्शन |
| नेशनल कॉन्फ्रेंस | J&K को पूर्ण राज्य का दर्जा | ❌ अलग राजनीतिक मुद्दा |
| गुरनाम सिंह चढ़ूनी | भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध | ❌ अलग किसान मुद्दा |
| महुआ मोइत्रा, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल | केंद्र सरकार पर हमला | ⚠️ छात्र मुद्दे के साथ राजनीति |
| राहुल गांधी और कांग्रेस | संसद मार्च और विपक्षी अभियान | ⚠️ छात्र + राजनीतिक मुद्दा |
| वंचित बहुजन आघाड़ी | महाराष्ट्र बंद | ❌ दूसरे राज्य की राजनीति |
| निहंग सिख समूह | प्रदर्शन में समर्थन | ❌ अलग सामाजिक-धार्मिक भागीदारी |
| उद्धव ठाकरे, शरद पवार | धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग | ⚠️ छात्र मुद्दे का राजनीतिक समर्थन |
जंतर मंतर पर NEET और CBSE का मामला, जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा और भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध तीनों एक साथ होने लगा. इन तीनों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं था, लेकिन बाहर से देखने वाले लोगों को यह सब एक ही बड़ा आंदोलन नजर आने लगा.
आंदोलन के तीन असर
- पहला असर यह हुआ कि मीडिया और जनता का ध्यान बंटने लगा. पहले खबरें NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार पर होती थीं. बाद में हेडलाइन ट्रैफिक जाम, सुरक्षा व्यवस्था और जंतर-मंतर के हालात पर ज्यादा होने लगीं.
- दूसरा असर यह हुआ कि 23 जुलाई को सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी हो गई कि जंतर-मंतर के आसपास कई मेट्रो स्टेशनों पर असर पड़ा और सेंट्रल दिल्ली में लंबा जाम लगा. इससे आम लोगों की चर्चा परीक्षा सुधार से ज्यादा ट्रैफिक और असुविधा पर होने लगी.
- तीसरा असर यह हुआ कि सरकार के लिए यह कहना आसान हो गया कि मामला अब सिर्फ छात्रों का नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग ले चुका है. इससे पेपर लीक की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा सुधार जैसी मूल मांगें कहीं न कहीं पीछे रह गईं.
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
NEET UG पेपर लीक और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जुड़ी शिकायतें लाखों छात्रों और अभिभावकों के भरोसे से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बना. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाया गया. इस फैसले के बाद जंतर मंतर पर छात्रों का रिएक्शन सामने आने लगा.
परीक्षा कानून संशोधन बिल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद 27 जुलाई को केंद्र सरकार लोकसभा में एक संशोधन बिल पेश करने जा रही है. इसमें पेपर लीक पर कड़ी सजा, फास्ट-ट्रैक कोर्ट, तय समय-सीमा में जांच, और एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का प्रावधान है. यह दिखाता है कि आंदोलन का सीधा असर अब कानून-निर्माण पर भी पड़ रहा है.
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