MBBS Seat पाने का ऐसा जुनून, एडमिशन के लिए काटा खुद का पैर

NEET Aspirant: नीट में 2 बार फेल हो जाने पर सूरज भास्कर ने पैर का पंजा काट लिया. MBBS सीट में PwD कोटा पाने के लिए इस युवक ने ऐसा कदम उठाया.

NEET Aspirant: नीट अस्पिरेंट AI जेनरेटेड तस्वीर

NEET Aspirant Cut Foot For Disability Quota: एक MBBS की सीट पाने के लिए स्टूडेंट्स क्या कुछ नहीं करते हैं. रातों की नींद खराब करते हैं और 12-15 घंटे की पढ़ाई करते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के रहने वाले युवक ने कुछ ऐसा कि जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं. जौनपुर के रहने वाले 25 साल के युवक ने विकलांग कोटे से एमबीबीएस सीट (MBBS Seat) पाने के लिए अपने ही पैर का पंजा काट लिया. इस युवक ने डीफार्मा कर रखा था. लेकिन नीट में दो बार असफल हो चुका था.

NEET Aspirant Cut Foot: खुद से काटा पैर का पंजा

डीफार्मा की डिग्री होने के कारण ये लड़का इंजेक्शन लगाना जानता था. सूरज भास्कर ने पहले पैर सुन्न होने का इंजेक्शन लगाया और फिर ग्राइंडर से अपने पैरों का पंजा काट लिया. उसने डिटेल जानकारी इंटरनेट से जुटाई थी.

MBBS Disability Quota: एमबीबीएस में विकलांगता का कोटा

MBBS में एडमिशन के लिए NEET के तहत दिव्यांग (PwD) कैंडिडेट्स को 5% रिजर्वेशन दिया जाता है. बेंचमार्क डिसएबिलिटी यानी कम से कम 40% विकलांगता वाले कैंडिडेट्स इस कैटेगरी में आते हैं. ऐसे स्टूडेंट्स को न सिर्फ रिजर्वेशन दिया जाता है बल्कि एग्जाम में अलग से समय और जरूरी फैसिलिटी भी दी जाती है.

  • MBBS में NEET के जरिए एडमिशन के लिए PwD उम्मीदवारों को 5% आरक्षण मिलता है.
  • पात्रता के लिए कम से कम 40% बेंचमार्क विकलांगता जरूरी होती है.
  • दिव्यांग उम्मीदवारों को परीक्षा में अतिरिक्त समय दिया जाता है (हर घंटे पर 20 मिनट).
  • जरूरत के अनुसार स्क्राइब/रीडर जैसी सहायक सुविधाएं भी मिलती हैं.

DPharma Course: क्या है डीफार्मा कोर्स?

डी फार्मा यानी डिप्लोमा इन फार्मेसी (Diploma In Pharmacy) एक दो साल का प्रोफेशनल डिप्लोमा कोर्स है. इसे 12वीं के बाद कर सकते हैं. इस कोर्स में स्टूडेंट्स को दवाओं को तैयार करना, उनके यूज और इफेक्ट की बेसिक जानकारी दी जाती है. फार्मासिस्ट बनने के लिए ये कोर्स कर सकते हैं.

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Published by: Shambhavi Shivani

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