आधा भारत नहीं जानता: अमेरिकी सेना में है इंडिया कंपनी, जानें कैसे करती है काम?

US Army India Company: अमेरिका सेना में इंडिया कंपनी है. यह यूएस मरीन का एक प्रमुख हिस्सा है. यह सैनिकों के रिक्रूटमेंट की सबसे निचली इकाइयों में से एक है. भारत के नाम पर रखे जाने के बावजूद अब तक कई लोग इससे अनजान हैं.

US Army India Company: अमेरिकी सेना में इंडिया कंपनी. सुनकर आश्चर्य हुआ? भारतीय हैं तो हो भी सकता है. लेकिन यह सच है. अमेरिकी सेना की सबसे प्रभावशाली इकाइयों में से एक यूएस मरीन कॉर्प्स (US Marine Corps) के भीतर कई विशेष राइफल कंपनियां होती हैं. इन्हीं में से एक है ‘इंडिया कंपनी’, जो आम तौर पर किसी बटालियन की तीसरी कंपनी के रूप में संगठित होती है. यह इकाई विशेष रूप से इन्फैंट्री (पैदल सैनिक) पर केंद्रित होती है और अक्सर महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों तथा प्रशिक्षण गतिविधियों में भाग लेती है.

दरअसल, ‘इंडिया’ नाम नाटो के फोनेटिक अल्फाबेट से लिया गया है, जहां अक्षर ‘आई’ को ‘इंडिया’ कहा जाता है. इसी वजह से किसी बटालियन में कंपनियों को क्रम से अल्फा, ब्रावो, चार्ली और आगे के अक्षरों के आधार पर नाम दिया जाता है. इस क्रम में ‘इंडिया कंपनी’ आमतौर पर तीसरी कंपनी मानी जाती है. उदाहरण के तौर पर यह अक्सर तीसरी बटालियन, पहली मरीन रेजिमेंट या तीसरी बटालियन, पांचवीं मरीन रेजिमेंट जैसी इकाइयों का हिस्सा होती है.

6 मार्च 2026 को यूएस आर्मी के सदर्न कमांड ने एक वीडियो साझा किया. यह सबसे पहले 22वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट द्वारा शेयर किया गया था. इसमें अमेरिकी सैनिकों द्वारा किए गए अभ्यास को दिखाया गया है. हालांकि सबसे पहले जिस कंपनी का जिक्र किया गया, वह इंडिया कंपनी ही थी. इसके बाद किलो कंपनी, लीमा कंपनी और कई अन्य कंपनियों का भी उल्लेख किया गया.

क्या करती है इंडिया कंपनी?

इंडिया कंपनी का मुख्य काम इन्फैंट्री ऑपरेशन से जुड़ा होता है. यह इकाई कॉम्बैट ट्रेनिंग, उभयचर (एम्फीबियस) ऑपरेशन की तैयारी और विशेष सैन्य मिशनों में भाग लेती है. कई बार यह दूतावासों की सुरक्षा और मजबूती जैसे विशेष अभियानों में भी तैनात की जाती है.

प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी इंडिया कंपनी की अहम भूमिका होती है. कैलिफोर्निया में स्थित मरीन कॉर्प्स रिक्रूट डिपो सैन डिएगो में तीसरी रिक्रूट ट्रेनिंग बटालियन के भीतर यह कंपनी नए मरीन सैनिकों को प्रशिक्षण देती है. इस प्रशिक्षण में राइफल संचालन, निशानेबाजी (मार्क्समैनशिप) और फील्ड अभ्यास शामिल होते हैं.

यहां, ध्यान देने वाली बात यह है कि ‘इंडिया कंपनी’ विशेष रूप से यूएस मरीन कॉर्प्स की इकाई है. आम तौर पर यूएस आर्मी में कंपनियों के लिए इस तरह की नामकरण प्रणाली का इस्तेमाल नहीं किया जाता. वहां अलग प्रकार के सैन्य पदनाम प्रचलित हैं.

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कैसे बंटती हैं आर्मी की कंपनीज?

किसी भी पेशेवर सेना में यूनिट्स को अलग-अलग स्तरों में बांटा जाता है. सबसे छोटी यूनिट कंपनी होती है, जिसमें लगभग 100-200 सैनिक होते हैं. कई कंपनियों से मिलकर बटालियन बनती है और कई बटालियनों से रेजिमेंट बनती है. अमेरिका में यह सिस्टम मुख्य रूप से अमेरिकी थल सेना (यूएस आर्मी) और यूएस मरीन कॉर्प्स में इस्तेमाल होता है. दूसरी सैन्य शाखाएं जैसे नेवी (नौसेना), एयर फोर्स (वायु सेना) या कोस्ट गार्ड (तटरक्षक बल) अपनी अलग संरचना का उपयोग करती हैं.

कंपनियों की पहचान के लिए अक्षरों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे अल्फा, ब्रावो, चार्ली, फॉक्स आदि. ये नाम नाटो फोनेटिक अल्फाबेट से लिए गए हैं. उदाहरण के लिए फॉक्स कंपनी, दूसरी बटालियन, पांचवीं मरीन रेजिमेंट का मतलब है कि सैनिक फॉक्स नाम की कंपनी में है, जो दूसरी बटालियन और पांचवीं मरीन रेजिमेंट का हिस्सा है. मरीन कॉर्प्स में आमतौर पर कंपनी का नाम पहले लिखा जाता है, जैसे अल्फा कंपनी या ब्रावो कंपनी. अमेरिका की आर्मी में कभी-कभी कंपनी का नाम बाद में भी लिखा जाता है, जैसे कंपनी ई, दूसरी बटालियन, 506वीं रेजिमेंट. 

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भारत में कैसे बांटी जाती हैं सेना की यूनिट्स? 

अलग-अलग देशों में इसे लिखने का तरीका थोड़ा बदल सकता है. ब्रिटेन, भारत और कॉमनवेल्थ देशों में आमतौर पर कंपनी का अक्षर पहले लिखा जाता है, जैसे ए कंपनी, पहली बटालियन. रोजमर्रा की बातचीत में सैनिक इसे और आसान बना देते हैं और बस इतना कहते हैं कि ‘मैं अल्फा कंपनी में हूं.’ उदाहरण के लिए अगर कोई सैनिक अल्फा कंपनी, दूसरी बटालियन, राजपूत रेजिमेंट में है, तो इसका मतलब है कि वह अल्फा कंपनी में है, जो राजपूत रेजिमेंट की दूसरी बटालियन का हिस्सा है. कई बार इसे छोटा करके भी लिखा जाता है, जैसे अल्फा कंपनी, 2 राजपूत. यहां कंपनी (Coy) का मतलब कंपनी ही होता है.

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By Anant narayan shukla

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