Engineering Branch: पिछले कुछ सालों में इंजीनियरिंग और हायर एजुकेशन का माहौल तेजी से बदला है. एक समय था जब हर कोई सिर्फ कंप्यूटर साइंस (CS) और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) के पीछे भाग रहा था. लेकिन अब कंपनियों की जरूरतें और मार्केट का मूड बदल रहा है. आने वाले प्लेसमेंट सीजन में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है, और इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा कोर इंजीनियरिंग यानी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी ब्रांच को मिलेगा. आइए जानते हैं कि प्लेसमेंट का यह नया ट्रेंड क्या है और इस बार किस ब्रांच (Engineering Branch) की डिमांड में रहेगा.
Engineering Branch: किस ब्रांच को क्या मिलेगा फायदा?
| मुख्य हेडिंग | किस ब्रांच को फायदा | फायदा मिलने की बड़ी वजह |
| 1. सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग का बूम | इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन (ECE) | भारत में टाटा जैसी बड़ी कंपनियों का चिप मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश और सरकारी सब्सिडी |
| 2. ईवी (EV) और ऑटोमेशन क्रांति | इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) | इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (कार/बाइक) की बढ़ती डिमांड और बैटरी टेक्नोलॉजी में नए स्टार्टअप्स |
| 3. स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और रोबोटिक्स | मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ME) | ‘मेक इन इंडिया’ के तहत फैक्ट्रियों का डिजिटल होना, 3D प्रिंटिंग और ऑटोमेशन का बढ़ना |
| 4. इंफ्रास्ट्रक्चर और मेगा प्रोजेक्ट्स | सिविल इंजीनियरिंग (CE) | देश भर में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स, एयरपोर्ट्स और स्मार्ट सिटीज |
| 5. हाइब्रिड स्किल्स का नया ट्रेंड | सभी कोर ब्रांचेज (Core + AI/Coding) | कंपनियों को अब ऐसे इंजीनियर्स चाहिए जो अपनी ब्रांच के साथ-साथ कोडिंग और डेटा एनालिसिस भी जानते हों |
आईटी सेक्टर में मंदी और ‘कोर’ का कमबैक
पिछले कुछ समय से ग्लोबल मार्केट के हालात थोड़े सुस्त रहे हैं. आईटी कंपनियों में पहले जैसी लगातार हायरिंग नहीं हो रही है. बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां अब धीरे कदम रख रही हैं. ऐसे में प्लेसमेंट का पूरा फोकस अब कोर सेक्टर्स पर शिफ्ट हो रहा है. भारत में इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी सेक्टर पर सरकार और प्राइवेट कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं. यही वजह है कि मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की डिमांड अचानक बहुत तेजी से बढ़ी है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल ब्रांच को मिलेगा फायदा
अगर सबसे ज्यादा फायदे वाली किसी एक स्पेसिफिक ब्रांच की बात करें, तो वह है इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन (ECE) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE). आज की तारीख में दुनिया में दो चीजों का सबसे ज्यादा शोर है EV और सेमीकंडक्टर.
भारत सरकार देश को सेमीकंडक्टर (Engineering Branch) का ग्लोबल हब बनाने में जुटी है, और टाटा जैसी बड़ी कंपनियां चिप मैन्युफैक्चरिंग में अरबों का निवेश कर रही हैं. इन चिप्स को डिजाइन करने और बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स की जरूरत होती है. वहीं दूसरी तरफ, सड़कों पर दौड़ती इलेक्ट्रिक कारें और बाइक्स ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स के लिए नौकरियों की बाढ़ ला दी है.
मैकेनिकल और सिविल वालों को भी लाभ
मेक इन इंडिया और ऑटोमेशन के चलते मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Engineering Branch) के छात्रों की मांग भी खूब बढ़ रही है. अब कंपनियों को ऐसे लोग चाहिए जो रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को समझ सकें. वहीं, देश में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स, एयरपोर्ट्स और स्मार्ट सिटीज के कारण सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए भी प्लेसमेंट के शानदार मौके बन रहे हैं.
सिर्फ कोडिंग नहीं, अब ‘मल्टी-टास्किंग’ का जमाना है
इस बार प्लेसमेंट में कंपनियां एक नया ट्रेंड अपना रही हैं हाइब्रिड स्किल्स. कंपनियों को अब ऐसा मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियर चाहिए, जिसे थोड़ी-बहुत कोडिंग और डेटा एनालिसिस भी आता हो. जो छात्र अपनी कोर ब्रांच के साथ-साथ AI और कोडिंग की बेसिक समझ रखते हैं, उन्हें कंपनियां हायर कर रही है और पैकेज भी शानदार दे रही हैं.
छात्रों को क्या करना चाहिए?
- अपनी कोर थ्योरी मजबूत करें.
- लेटेस्ट टेक्नोलॉजी सीखें.
- प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दें.
यह भी पढ़ें: देश के 23 IITs में CS की सीटों का पूरा गणित, देखें कैटेगरी वाइज लिस्ट
