CMA vs CFA: आज के दौर में फाइनेंस सेक्टर सिर्फ अकाउंट्स तक सीमित नहीं रहा है. बल्कि यह इन्वेस्टमेंट, बैंकिंग, कॉरपोरेट प्लानिंग और ग्लोबल मार्केट तक फैल चुका है. ऐसे में जो स्टूडेंट्स फाइनेंस में मजबूत और हाई-पेइंग करियर बनाना चाहते हैं, उनके सामने दो बड़े और पॉपुलर प्रोफेशनल कोर्स आते हैं सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट (CMA) और चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट (CFA).
दोनों ही कोर्स इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त हैं और फाइनेंस की दुनिया में बहुत आगे माने जाते हैं. लेकिन अक्सर स्टूडेंट्स के मन में सवाल होता है कि इन दोनों में से (CMA vs CFA) कौन सा कोर्स बेहतर है और किसमें ज्यादा स्कोप है. आइए जानते हैं कि किस कोर्स को चुनना सही होगा.
CMA क्या है ?
CMA एक प्रोफेशनल कोर्स है, जो मुख्य रूप से मैनेजमेंट अकाउंटिंग और कॉर्पोरेट फाइनेंस पर बेस्ड होती है. सीएमए का मेन फोकस कॉस्ट मैनेजमेंट, बजटिंग, इंटरनल कंट्रोल, बिजनेस स्ट्रेटेजी और फाइनेंशियल प्लानिंग होता है. इस कोर्स को करने के बाद आप फाइनेंस मैनेजर, बिजनेस एनालिस्ट, CFO (चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर) और कॉस्ट अकाउंटेंट बन सकते हैं. CMA उन स्टूडेंट्स के लिए बेहतर है, जो कंपनियों में काम करके मैनेजमेंट लेवल पर पहुंचना चाहते हैं.
CFA क्या है ?
CFA एक इंटरनेशनल लेवल का कोर्स है, जो इंवेस्टमेंट और फाइनेंशियल मार्केट पर आधारित है. सीएफए कोर्स उन स्टूडेंट्स के लिए अच्छा है, जिसे स्टॉक मार्केट और इंवेस्टमेंट सेक्टर में करियर बनाना है. इसका मेन फोकस इंवेस्टमेंट एनलिसिस, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, फाइनेंशियल मार्केट्स और इक्विटी रिसर्च पर होता है. CFA कोर्स करने के बाद स्टूडेंट्स इंवेस्टमेंट बैंकर, इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट, पोर्टफोलियो मैनेजर और फाइनेंशियल एडवाइजर बन सकते हैं.
CMA vs CFA: फाइनेंस में कौन आगे है ?
कोर्स का सिलेक्शन (CMA vs CFA) करना स्टूडेंट्स के करियर गोल पर डिपेंड करता है. अगर आप कॉर्पोरेट कंपनी में फाइनेंस मैनेजर या CFO बनना चाहते हैं, तो CMA बेहतर ऑप्शन है. वहीं अगर आप इंवेस्टमेंट बैंकिंग, स्टॉक मार्केट या पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में जाना चाहते हैं, तो CFA ज्यादा फायदेमंद है.
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