CS vs EV Engineering: टेक्नीक की दुनिया में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां एक समय BTech कंप्यूटर साइंस (CS) को सबसे सेफ और पॉपुलर करियर माना जाता था. वहीं अब इलेक्ट्रिक व्हीकल इंजीनियरिंग (EV) तेजी से उभरती हुई ब्रांच बनती जा रही है. बढ़ते प्रदूषण, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और ग्रीन एनर्जी पर बढ़ते फोकस ने इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड को कई गुना बढ़ा दिया है.
भारत में कंपनियां जैसे Tata Motors और दुनिया की दिग्गज EV कंपनी Tesla लगातार नई इलेक्ट्रिक कारें और टेक्नोलॉजी डेवलप कर रही हैं. इससे EV Engineering में करियर के मौके तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या आने वाले समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल इंजीनियरिंग बीटेक सीएस (CS vs EV Engineering) को टक्कर दे सकती है.
Electric Vehicle Engineering क्या है ?
इलेक्ट्रिक व्हीकल इंजीनियरिंग वह ब्रांच है, जिसमें इलेक्ट्रिक कार, बाइक, बसों की डिजाइनिंग, बैटरी टेक्नोलॉजी, मोटर सिस्टम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया जाता है. यह मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स का कॉम्बिनेशन होता है. इलेक्ट्रिकल व्हीकल इंजीनियरिंग फ्यूचर की टेक्नोलॉजी से जुड़ा हुआ कोर्स है.
CS vs EV Engineering: EV इंजीनियरिंग क्यों बन रही है फ्यूचर ब्रांच ?
EV सेक्टर में डिजाइन इंजीनियर, बैटरी स्पेशलिस्ट, R&D इंजीनियर जैसी नई नौकरियां तेजी से बढ़ रही है. CS में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा होने के कारण EV ब्रांच की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. सरकार अब EV को बढ़ावा दे रही है. पर्यावरण बचाने के लिए EV को फ्यूचर माना जा रहा है.
टॉप कॉलेज
भारत में कई ऐसे इंस्टट्यूट हैं, जहां EV से जुड़े कोर्स शुरू कर रहे हैं, जैसे-
- IIT दिल्ली
- IIT बॉम्बे
- IIT मद्रास
- BITS पिलानी
- IIT कानपुर
सैलरी और करियर स्कोप
इलेक्ट्रिकल व्हीकल इंजीनियरिंग करने के बाद शुरुआती सैलरी लगभग 5-10 लाख प्रतिवर्ष हो सकती है. एक्सपिरियंस बढ़ने के साथ सैलरी 20 लाख या उससे ज्यादा भी हो सकता है. EV सेक्टर में स्टार्टअप्स और रिसर्च के अवसर भी बढ़ रहे हैं.
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