Atal Bihari Vajpayee Chevening Scholarship: पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि कल यानी 16 अगस्त को है. पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर शुरू हुई एक ऐसी योजना की चर्चा जरूरी है, जो सीधे छात्रों के करियर से जुडी है. आइए अटल बिहारी वाजपेयी-चिवनिंग स्कॉलरशिप के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Atal Bihari Vajpayee Chevening Scholarship की शुरुआत कब और कैसे हुई?
19 अगस्त 2025 को लखनऊ में ब्रिटेन की भारत में उच्चायुक्त लिंडी कैमरून ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में इस योजना को लेकर ब्रिटेन के फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (FCDO) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए.
इससे पहले 7 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इस योजना को मंजूरी दी थी. यह योजना अटल जी की उपलब्धियों से प्रेरणा लेकर शुरू की गई है और इसका मकसद राज्य के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और नेतृत्व में आगे बढने का मौका देना है.
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कितने छात्रों को मिलेगा फायदा?
हर साल उत्तर प्रदेश के 5 मेधावी छात्रों को इस योजना के तहत चुना जाएगा. ये छात्र ब्रिटेन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक साल के मास्टर डिग्री कोर्स के लिए स्कॉलरशिप पाएंगे. यह योजना शैक्षणिक सत्र 2025-26 से शुरू होकर तीन साल (2025-26, 2026-27, 2027-28) तक चलेगी, जिसके बाद इसे आगे जारी रखने पर फैसला लिया जाएगा.
Atal Bihari Vajpayee Chevening Scholarship: एक नजर में
| सुविधा | विवरण |
| ट्यूशन फीस | पूरी तरह कवर |
| परीक्षा व शोध शुल्क | पूरी तरह कवर |
| रहने का खर्च | पर्याप्त मासिक भत्ता |
| हवाई यात्रा | एक बार आने-जाने का इकोनॉमी क्लास टिकट |
| कुल अनुमानित खर्च | लगभग 38,048 से 42,076 पाउंड (करीब 45-48 लाख रुपए) प्रति छात्र |
इस योजना की फंडिंग दो हिस्सों में बंटी है- उत्तर प्रदेश सरकार हर छात्र पर करीब 23 लाख रुपए खर्च करेगी, जबकि बाकी राशि ब्रिटेन का FCDO वहन करेगा. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 2 करोड़ रुपए का बजट भी तय किया है.
कौन कर सकता है अप्लाई?
स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी:
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) डिग्री होनी चाहिए.
- आवेदन की तारीख से कम से कम दो साल पहले ग्रेजुएशन पूरा किया हो.
- न्यूनतम दो साल या 2,800 घंटे का प्रोफेशनल कार्य अनुभव जरूरी है.
- अंग्रेजी भाषा की निर्धारित योग्यता पूरी करनी होगी.
- जिन छात्रों को पहले किसी ब्रिटिश सरकारी स्कॉलरशिप का लाभ मिल चुका है, वे पात्र नहीं होंगे
अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के मौके पर उनके नाम पर शुरू हुई यह योजना उनकी शिक्षा और युवाओं को लेकर सोच की एक झलक है. छात्रों के लिए यह न सिर्फ विदेश में पढाई का सपना पूरा करने का मौका है, बल्कि अपने राज्य से भी ऐसी ही किसी योजना की उम्मीद जगाने वाला कदम भी है.
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