Top NITs में एडमिशन से पहले समझ लें State Quota का पूरा गणित, नहीं तो बर्बाद हो सकता है एक साल

Home State Quota Vs Other State Quota: NITs में लगभग 50 प्रतिशत सीटें उस राज्य के छात्रों के लिए रिजर्व होती हैं, जहां वह NIT स्थित है. आइए, समझते हैं NIT में कोटा का पूरा गणित.

Home State Quota Vs Other State Quota: JEE Main में अच्छी रैंक लाना ही Top NITs में एडमिशन की गारंटी नहीं होता. कई बार समान रैंक वाले दो छात्रों में से एक को आसानी से सीट मिल जाती है, जबकि दूसरे को नहीं. इसकी सबसे बड़ी वजह होती है Home State (HS) Quota और Other State (OS) Quota. खासकर National Institute of Technology Tiruchirappalli, National Institute of Technology Warangal और National Institute of Technology Karnataka Surathkal जैसे टॉप NITs में यह अंतर काफी बड़ा हो जाता है.

क्या है होम स्टेट कोटा और अन्य स्टेट कोटा का फर्क?

NITs में लगभग 50 प्रतिशत सीटें उस राज्य के छात्रों के लिए रिजर्व होती हैं, जहां वह NIT स्थित है. इसे Home State Quota कहा जाता है. बाकी 50 प्रतिशत सीटें देशभर के अन्य राज्यों के छात्रों के लिए होती हैं, जिसे Other State या All India Quota कहा जाता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी छात्र ने तमिलनाडु से 12वीं पास की है, तो उसे NIT Trichy में Home State का फायदा मिलेगा. वहीं दूसरे राज्यों के छात्रों को उसी कॉलेज में OS Quota के तहत मुकाबला करना होगा.

यही वजह है कि कई बार Home State छात्रों के लिए कटऑफ काफी कम चली जाती है, जबकि Other State छात्रों के लिए उसी ब्रांच की कटऑफ बहुत हाई रहती है. कम प्रतिस्पर्धा वाले राज्यों के छात्रों को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है.

कैसे तय होता है Home State?

कई छात्र सोचते हैं कि डोमिसाइल या रहने का राज्य ही Home State माना जाएगा, लेकिन JoSAA नियमों के अनुसार Home State उस राज्य को माना जाता है, जहां से छात्र ने पहली बार 12वीं बोर्ड परीक्षा पास की हो. यानी अगर किसी छात्र का घर बिहार में है लेकिन उसने 12वीं झारखंड से की है, तो JoSAA में उसका Home State झारखंड माना जाएगा.

IITs और IIITs में क्या होता है?

IITs में Home State Quota नहीं होता. वहां एडमिशन पूरी तरह All India Rank के आधार पर होता है. वहीं कई IIITs और GFTIs में भी HS-OS सिस्टम लागू नहीं होता या अलग नियम होते हैं.

एडमिशन के समय क्यों जरूरी है यह समझना?

JoSAA Counselling के दौरान सही Choice Filling के लिए HS और OS Quota को समझना बेहद जरूरी होता है. कई छात्र केवल कॉलेज देखकर ऑप्शन भर देते हैं, लेकिन State Quota की वजह से उनकी सीट छूट सकती है.

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By Shambhavi shivani

शाम्भवी शिक्षा, रोजगार, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी पर खास नजर रखती हैं. उन्होंने प्रभात खबर के लिए कई UPSC और BPSC टॉपर्स के इंटरव्यू लिए हैं. साथ ही इस प्लेटफॉर्म के लिए AI एजुकेशन और करियर गाइडेंस पर एक्सपर्ट ओपनियन भी बनाती हैं. उनकी खासियत है कि वो डाटा रिलेटेड खबरों और फैक्ट्स को आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाती हैं. शाम्भवी को डिजिटल मीडिया में 3 सालों से अधिक का अनुभव है. प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और पटना स्थित न्यूज़ हाट में भी काम कर चुकी हैं. 

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