5 साल का MBBS, फीस 1.3 लाख, बेस्ट है बिहार का ये मेडिकल कॉलेज

Best MBBS College in Bihar: बिहार में MBBS के लिए कई सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं. इन्हीं में एक नालंदा के पावापुरी में स्थित भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (BHIMS) है. इस कॉलेज में एमबीबीएस की 120 सीटें हैं. आइए यहां के फीस के बारे में जानते हैं.

Best MBBS College in Bihar: जहां एक तरफ प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में MBBS करने के लिए लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं, वहीं यहां पूरे कोर्स की फीस बेहद कम है. यही वजह है कि हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा में बेहतर रैंक लाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, ताकि उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल सके.

एडमिशन के समय कितनी फीस देनी होगी?

भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (BHIMS) में दाखिला लेते समय कुछ फीस सिर्फ एक बार जमा करनी होती है. इसमें एडमिशन फीस, कॉशन मनी, कॉलेज एक्टिविटी, स्टूडेंट वेलफेयर फंड और स्टूडेंट यूनियन फंड शामिल हैं. इन सभी को जोड़ने पर शुरुआत में करीब ₹18,100 जमा करने होंगे. इसके अलावा वेबसाइट पर ₹1,000 Miscellaneous Charges भी दिए गए हैं. अगर यह भी एडमिशन के समय ही लिए जाते हैं, तो शुरुआती फीस करीब ₹19,100 हो जाती है.

हर साल कितना खर्च आएगा?

एक बार एडमिशन लेने के बाद हर साल ट्यूशन फीस, हॉस्टल फीस, बिजली शुल्क और मैगजीन सोसाइटी की फीस देनी होगी. इन सभी को मिलाकर सालाना खर्च करीब ₹22,700 बैठता है. यानी हर साल पढ़ाई और हॉस्टल का खर्च मिलाकर करीब तेईस हजार रुपये के आसपास फीस देनी होगी.

पूरे 5 साल में कुल कितनी फीस बनेगी?

अगर MBBS का पूरा कोर्स 5 साल का माना जाए, तो सालाना फीस के हिसाब से करीब ₹1,13,500 खर्च होंगे. इसमें एडमिशन के समय दी जाने वाली वन-टाइम फीस जोड़ दें, तो पूरे कोर्स की फीस लगभग ₹1,31,600 बैठती है. अगर वेबसाइट पर दिए गए Miscellaneous Charges भी जोड़ दिए जाएं, तो कुल खर्च करीब ₹1,32,600 हो जाता है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह चार्ज हर साल देना होगा या सिर्फ एक बार.

प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से कितना सस्ता?

सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फीस में जमीन-आसमान का अंतर है. कई निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है. वहीं इस सरकारी कॉलेज में पूरा MBBS कोर्स करीब ₹1.3 लाख में पूरा हो जाता है. यही कारण है कि सरकारी मेडिकल सीट हासिल करना हर मेडिकल छात्र का सबसे बड़ा सपना माना जाता है.

कम फीस, लेकिन सीट पाना आसान नहीं

फीस कम होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि एडमिशन आसान है. सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें सीमित होती हैं, जबकि हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा देते हैं. ऐसे में अच्छी रैंक लाने वाले छात्रों को ही सरकारी कॉलेज में दाखिला मिल पाता है. कम फीस, बेहतर पढ़ाई, अनुभवी फैकल्टी और कम खर्च में डॉक्टर बनने का मौका ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों को सबसे ज्यादा आकर्षक बनाता है.

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लेखक के बारे में

By रवि मल्लिक

रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.

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