खास बातें
Calcutta High Court Slams Bengal Govt: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार को जमकर फटकार लगायी है. हाईकोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ (BSF) को जमीन सौंपने के आदेश का पालन न करने पर अदालत ने सरकार के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया.
127 किलोमीटर में सिर्फ 8 किमी जमीन बीएसएफ को दी
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने सरकार की कार्यप्रणाली पर हैरानी जताते हुए कहा कि 127 किलोमीटर में से अब तक केवल 8 किलोमीटर जमीन ही बीएसएफ को दी गयी है. अदालत ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है.
चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है मामला : हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 जनवरी को आदेश दिया था कि राज्य सरकार 31 मार्च तक अधिग्रहीत की गयी 127 किलोमीटर जमीन बीएसएफ को सौंप दे. इसके लिए केंद्र सरकार से मुआवजा भी राज्य को मिल चुका है. 22 अप्रैल को मामले की सुनवाई हुई, तो पता चला कि सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया.
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हाईकोर्ट ने अधिकारी पर लगाया जुर्माना
अदालत के आदेश की अवहेलना करने और ‘टालमटोल’ वाली रिपोर्ट दाखिल करने के लिए संबंधित अधिकारी पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है. यह राशि अधिकारी को अपनी निजी जेब से भरनी होगी. खंडपीठ ने कहा कि ऐसी संक्षिप्त और अधूरी रिपोर्ट दाखिल करने की प्रथा बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
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राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल : केवल 8 KM जमीन ही क्यों मिली?
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा (सेवानिवृत्त) द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां कीं. अदालत ने कहा कि सरकार ने यह नहीं बताया कि जनवरी के आदेश के बाद जिलेवार क्या कदम उठाये गये. कोर्ट ने पूछा कि यदि पूरी जमीन नहीं सौंपी जा सकी, तो इसके पीछे के ठोस कारण रिपोर्ट में क्यों नहीं लिखे गये.
2 सप्ताह में राज्य सरकार से कोर्ट ने मांगा हलफनामा
अब राज्य सरकार को 2 सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा. इसमें तिथि और स्थानवार जानकारी देनी होगी कि बीएसएफ को जमीन देने के लिए क्या दैनिक कार्यवाही की गयी.
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Calcutta High Court Slams Bengal Govt: 9 जिलों से जुड़ा है मामला
भारत-बांग्लादेश सीमा पश्चिम बंगाल के 9 महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरती है. बाड़ न होने के कारण घुसपैठ और तस्करी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. केंद्र सरकार पहले ही इस जमीन के लिए भुगतान कर चुकी है. फिर भी राज्य स्तर पर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अटकी हुई है. अब इस संवेदनशील मामले की सुनवाई 13 मई को होगी. तब तक सरकार को हर जिले की प्रगति रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी होगी.
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