दुनिया के सबसे बड़े निवेशक ने दान कर दिए 10,000 करोड़, मौत के बाद बंटेगी संपत्ति

Warren Buffett: वॉरेन बफेट ने अपने वसीयतनामे को भी अपडेट किया है. उन्होंने इसमें स्पष्ट किया है कि उनकी मौत के बाद बची हुई 95% संपत्ति का बंटवारा किया जाएगा.

Warren Buffett: दुनिया के दिग्गज निवेशक और अरबपति उद्योगपति 94 साल के वॉरेन बफेट ने 150 अरब डॉलर की कुल संपत्ति में से 1.1 बिलियन डॉलर (10,000 करोड़) रुपये दान कर दिया. उन्होंने इतनी बड़ी रकम चार चैरिटी फाउंडेशन को दान में दिया है. उन्होंने इस बात का खुलासा अपने ताजा नोट में किया है. उन्होंने अपने नोट में इस बात का भी खुलासा किया है कि मौत के बाद उनकी संपत्ति का बंटवारा होगा.

वॉरेन बफेट ने पारिवारिक फाउंडेशन को दिया दान

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट ने 25 नवंबर 2024 को अपने परिवार की ओर से चलाए जा रहे चार फाउंडेशन को 1.1 बिलियन डॉलर दान में दिए हैं. उन्होंने 1.1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की बर्कशायर हैथवे का शेयर अपने पारिवारिक फाउंडेशन को दिए हैं. वॉरेन बफेट ने जिन फाउंडेशन को दान दिए हैं, उनमें उनकी पत्नी सूसी के नाम पर बने सुसान थॉम्पसन बफेट फाउंडेशन को 1.50 लाख शेयर, शेरवुड फांडेशन, हॉवर्ड जी. बफेट फाउंडेशन और नोवो फाउंडेशन को क्रमश: 3-3 लाख शेयर दिए गए हैं.

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वॉरेन बफेट को तीनों बच्चों पर है पूरा भरोसा

रिपोर्ट में कहा गया है कि वॉरेन बफेट ने अपने वसीयतनामे को भी अपडेट किया है. उन्होंने इसमें स्पष्ट किया है कि उनकी मौत के बाद बची हुई 95% संपत्ति का बंटवारा किया जाएगा. वॉरेन बफेट ने अपने बच्चों पर भरोसा जताते हुए कहा है कि बर्कशायर हैथवे में उनकी संपत्ति को संभालेंगे. उन्होंने अपनी वसीयत में यह भी कहा है कि वे वंशवाद को बढ़ावा देने या बच्चों को आगे बढ़ाने वाली योजना नहीं बनाए हैं.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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