विवाद से विश्वास योजना के तहत आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर फॉर्म जमा कर सकते हैं टैक्सपेयर्स

प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना (विवाद से विश्वास योजना) का लाभ लेने को इच्छुक करदाता अपना घोषणापत्र आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर फॉर्म भर सकते हैं.

नयी दिल्ली : प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना (विवाद से विश्वास योजना) का लाभ लेने को इच्छुक करदाता अपना घोषणापत्र आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर फॉर्म भर सकते हैं. आयकर निदेशालय (प्रणाली) ने गुरुवार को विवाद से विश्वास योजना के तहत घोषणा के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया को अधिसूचित किया है. इस योजना की सुविधा उठाने के इच्छुक करदाता 31 मार्च तक विवादित कर की राशि का पूरा भुगतान कर देते हैं, तो उन्हें उस पर ब्याज और जुर्माने से पूरी छूट मिलेगी, लेकिन मामले के समाधान के लिए 31 मार्च के बाद भुगतान करने पर विवादित देय कर से 10 फीसदी अधिक राशि जमा करानी होगी. हालांकि, संपत्ति कर, जिंस सौदा कर और कंपनियों के बीच होने वाले सौदे पर लगने वाला कर (एक्विलाइजेशन शुल्क) से संबंधित विवाद के मामले इसके दायरे में नहीं आते. योजना 30 जून तक खुली रहेगी.

फॉर्म ई-फाइलिंग पोर्टल incometaxindiaefiling.gov.in पर भरे जा सकते हैं. इससे पहले, सरकार ने योजना से जुड़े नियमों और पांच ऑनलाइन फॉर्म अधिसूचित किये थे. ये फार्म उन करदाताओं को भरने हैं, जो विवाद से विश्वास योजना का लाभ उठाना चाहते हैं. आयकर विभाग ने कहा कि फॉर्म 1 में घोषणा, फॉर्म 2 में हलफनामा और फॉर्म 4 में भुगतान का ब्योरा का सत्यापन डिजिटल हस्ताक्षर या इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन कोड (ईवीसी) के जरिये होगा.

राजस्व विभाग ने योजना के तहत पांच फॉर्म अधिसूचित किया है. इसे ऑनलाइन भरने की जरूरत होगी. पात्र करतदाता को नामित प्राधिकरण के पास फॉर्म 1 में अपनी घोषणा करनी होगी. साथ ही, संबंधित करदाता को कर बकाया के संबंध में किसी भी कानून के तहत कोई दावा करने की अनुमति नहीं होगी और उसे इस बारे में फार्म 2 में हलफनामा देना होगा. घोषणा फार्म (फार्म 1) में कर बकाया की प्रकृति, आकलन वर्ष, आदेश का ब्योरा, बकाया कर राशि में पहले ही किये जा चुके भुगतान आदि के बारे में विस्तार से ब्योरा देना होगा.

दोबारा योजना के तहत विभिन्न परिस्थितियों में फॉर्म में देय कर के आकलन के तरीके को दिया गया है. यानी इसमें विवादित कर/टीडीएस/टीसीएस/विवादित ब्याज/ विवादित जुर्माना या शुल्क के लिये कर देनदारी के बारे में पूरा ब्योरा होगा. घोषणा फॉर्म और हलफनामा प्राप्त होने के बाद नामित प्राधिकरण 15 दिन के भीतर आदेश (फॉर्म 3) जारी करेगा. इसमें करदाता को पहले से भुगतान की गयी राशि के समायोजन के बाद कुल राशि के भुगतान के लिए कहा जाएगा.

फॉर्म 3 के तहत करदाता को भुगतान और मनोनीत प्राधिकरण को उसकी सूचना देने के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा. भुगतान के बारे में सूचना फॉर्म 4 में देना होगा. इसमें चलान की संख्या, भुगतान तारीख और राशि का ब्योरा देना होगा. अगर निर्धारित राशि नियत अवधि में नहीं दी जाती है, घोषणा करने के आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा. अंत में नामित प्राधिकरण प्रमाणपत्र (फॉर्म 5) जारी करेगा. इसमें विवादित राशि के बारे में पूरा ब्योरा और दी गयी छूट की जानकारी होगी.

इस बारे में नांगिया एंडर्सन कंस्टलिंग के चेयरमैन राकेश नांगिया ने कहा कि फॉर्म और नियम निर्धारित तारीख से केवल 10 दिन पहले अधिसूचित किये गये हैं. इसके अलावा, सभी फॉर्म को ऑनलाइन भरने की जरूरत है और ई-फॉर्म को अभी जारी किया जाना है. इसमें एक-दो दिन का और समय लग सकता है.

उन्होंने कहा कि व्यवहारिक रूप से करदाताओं के पास 31 मार्च या उससे पहले इस योजना का लाभ उठाने के लिए कामकाजी दिवस केवल 7-9 दिन बचा है. नांगिया ने कहा कि इसीलिए व्यावहारिक रूप से करदाताओं के साथ-साथ नामित प्राधिकरणों के लिए सभी मामलों की जांच करना और 31 मार्च, 2020 या उससे पहले भुगतान करना मुश्किल होगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: KumarVishwat Sen

Published by: Prabhat Khabar

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >