Year Ender 2022 : असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का बढ़ेगा सामाजिक सुरक्षा दायरा, जानें क्या कहती है सरकार

भारत अगले साल 2023 में पहली बार जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार है. ऐसे में केंद्रीय श्रम मंत्रालय वैश्विक स्तर पर कौशल में अंतर, अस्थायी और मंच अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा.

नई दिल्ली : भारत में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा दायरे में अगले साल वर्ष 2023 में विस्तार होने की संभावना दिखाई दे रही है. इसके साथ ही, नए साल 2023 में केंद्र सरकार श्रम संहिता के नियमों को बनाने के लिए राज्यों सरकारों को प्रेरित भी कर सकती है. यह सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके साथ ही, सरकार श्रम बाजार को मजबूत बनाने के प्रयासों के तहत अपनी इन प्राथमिकताओं को पूरा करने पर विशेष ध्यान देगी.

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलेगा योजनाओं का लाभ

बता दें कि भारत अगले साल 2023 में पहली बार जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार है. ऐसे में केंद्रीय श्रम मंत्रालय वैश्विक स्तर पर कौशल में अंतर, अस्थायी और मंच अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने समाचार एजेंसी भाषा से कहा कि हमारा प्रयास 2023 में बड़ी संख्या में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाने और उन्हें उनकी पात्रता के हिसाब से लाभ ऑनलाइन उपलब्ध कराना है. हम मंत्रालय में प्रक्रियाओं को पेपरलेस बनाना चाहते हैं.

चार श्रम संहिताओं को संसद की मंजूरी

उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध, मजदूरी और व्यावसायिक सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों (ओएसएच) पर चार श्रम संहिताओं को संसद द्वारा पहले ही मंजूरी दे दी गई है, लेकिन उन्हें तभी लागू किया जा सकता है, जब केंद्र और राज्य संबंधित नियमों को अधिसूचित करें, क्योंकि श्रम एक समवर्ती विषय है. उन्होंने कहा कि केंद्र नियमों के साथ तैयार है, जबकि कुछ राज्यों में अभी नियम बनाने की कवायद पूरी नहीं हुई है. 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने वेतन संहिता-2019 के लिए नियमों का मसौदा जारी किया है. वहीं, 28 राज्यों में से प्रत्येक ने औद्योगिक संबंध संहिता-2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता के लिए इस प्रक्रिया को पूरा किया है. 26 ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने ओएसएच संहिता, 2020 के तहत नियमों का मसौदा जारी किया है. केंद्र इन चार संहिताओं के क्रियान्वयन के लिए राज्यों के साथ काम कर रहा है. ये संहिताएं असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं.

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श्रम एक समवर्ती विषय

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत में एक संघीय ढांचा है. श्रम एक समवर्ती विषय है. हमने चार श्रम संहिताओं पर पहले से ही मसौदा नियम प्रकाशित किए हैं. राज्य इस प्रक्रिया को पूरा करने की प्रक्रिया में हैं. हम उन्हें प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि इन संहिताओं को उचित समय पर लागू कर दिया जाएगा. ये चार संहिताएं श्रमिकों के लिए उपलब्ध संरक्षण को मजबूत करने मसलन असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सांविधिक न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित हैं. ये संहिताएं श्रमिकों को न्यूनतम और समय पर भुगतान का सांविधिक अधिकार भी प्रदान करती हैं.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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