Share Market: दो दिनों की गिरावट के बाद संभला भारतीय बाजार, सेंसेक्स 276 अंक चढ़ा

Share Market Closing Bell: अमेरिका में नीतिगत दर को लेकर चिंता कम होने से वहां के बाजारों में तेजी के रुख के बीच धातु, बैंक और ऊर्जा शेयरों में लिवाली से बाजार बढ़त में रहा. तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 275.62 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65,930.77 अंक पर बंद हुआ.

Share Market Closing: ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मजबूत संकेतों के बीच, शेयर बाजारों में दो दिन की गिरावट के बाद मंगलवार को तेजी लौटी और बीएसई सेंसेक्स 276 अंक के लाभ में रहा. अमेरिका में नीतिगत दर को लेकर चिंता कम होने से वहां के बाजारों में तेजी के रुख के बीच धातु, बैंक और ऊर्जा शेयरों में लिवाली से बाजार बढ़त में रहा. तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 275.62 अंक यानी 0.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65,930.77 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 427.21 अंक तक चढ़ गया था. सेंसेक्स में शामिल 18 शेयर लाभ में जबकि 12 नुकसान में रहे. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 89.40 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,783.40 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में जेएसडब्ल्यू स्टील का शेयर सबसे ज्यादा 1.76 प्रतिशत के लाभ में रहा. टाटा स्टील का शेयर 1.45 प्रतिशत और टाइटन का 1.44 प्रतिशत चढ़ गया. इसके अलावा सन फार्मा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और टाटा मोटर्स प्रमुख रूप से लाभ में रहीं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर हुए रॉकेट

रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.24 प्रतिशत लाभ में रही. इसके साथ इसमें दो दिन से जारी गिरावट थम गयी. दूसरी तरफ, नुकसान में रहने वाले शेयरों में एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, मारुति, भारतीय स्टेट बैंक और लार्सन एंड टुब्रो शामिल हैं. जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि आज बाजार में सकारात्मक रुख रहा. निवेशकों की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के रुख पर है. अमेरिका में मुद्रास्फीति में नरमी और रोजगार के बेहतर आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की तरफ से उदार रुख का आधार बनता दिख रहा है. उन्होंने कहा कि बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट और डॉलर सूचकांक ब्याज दर के उच्चस्तर पर पहुंचने का संकेत देता है. उन्होंने कहा कि इससे उभरते बाजारों में संस्थागत निवेशक आकर्षित होंगे. बाजार में जो व्यापक स्तर पर लाभ है, वह टिकाऊ उपभोक्ता और रियल्टी की अगुवाई में आया है और इसकी वजह त्योहारों के दौरान मांग का मजबूत होना है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के आज जारी होने वाले ब्योरे से पहले अमेरिकी डॉलर सूचकांक 0.10 प्रतिशत नरम होकर 103.33 रहा.

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बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 0.20 प्रतिशत चढ़ा

बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 0.20 प्रतिशत चढ़ा, जबकि मिडकैप 0.14 प्रतिशत के लाभ में रहा. एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी लाभ में जबकि जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे. यूरोप के प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार में मिला-जुला रुख रहा. अमेरिकी बाजार सोमवार को सकारात्मक दायरे में रहे. इसका कारण बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और डॉलर में गिरावट है. इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 645.72 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे. सेंसेक्स में सोमवार को 139.58 और निफ्टी में 37.80 अंक की गिरावट आई थी.

रुपया 10 पैसे की बढ़त के साथ 83.28 प्रति डॉलर पर

विदेशी बाजारों में अमेरिकी मुद्रा में गिरावट और घरेलू शेयर बाजारों के सकारात्मक रुख के बीच मंगलवार को रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबर गया और डॉलर के मुकाबले 10 पैसे उछलकर 83.28 पर बंद हुआ. विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियों की डॉलर मांग और विदेशी संस्थागत निवेशकों की सतत निकासी से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई जिससे रुपये में में तेजी आई. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 83.33 पर खुला और अंत में डॉलर के मुकाबले 83.28 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद से 10 पैसे की बढ़त है. दिन में कारोबार के दौरान रुपया एक सीमित दायरे में कारोबार करते हुए डॉलर के मुकाबले 83.32 के उच्चतम स्तर तक गया और 83.37 के निचले स्तर तक आया. सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे टूटकर अपने सर्वकालिक निचले स्तर 83.38 पर बंद हुआ था.

रुपये को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

शेयरखान बाय बीएनपी परिबा के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, कमजोर अमेरिकी डॉलर और सकारात्मक एशियाई बाजारों के कारण रुपये में तेजी आई. हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी ने तेज बढ़त को सीमित कर दिया. आगामी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने की बढ़ती उम्मीदों के बीच डॉलर में गिरावट आई और यह ढाई महीने के निचले स्तर पर आ गया. उन्होंने कहा कि कारोबारी अमेरिका में घर बिक्री के आंकड़ों और एफओएमसी बैठक के ब्योरे से आगे का संकेत ले सकते हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भी रुपये को दिशा मिलेगी. इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 103.37 पर आ गया.वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81.67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.

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