डॉलर के मुकाबले रुपया संभला, तीन पैसे मजबूत होकर 87.08 पर बंद, जानें प्रमुख कारण

Rupees: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले तीन पैसे मजबूत होकर 87.08 पर बंद हुआ. अमेरिकी शुल्क नीतियों में बदलाव से डॉलर सूचकांक में गिरावट आई. जानें रुपये की मजबूती के पीछे के प्रमुख कारण और आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति बैठक का संभावित प्रभाव.

हाइलाइट्स

  • रुपये में सुधार: डॉलर के मुकाबले तीन पैसे की मजबूती, 87.08 पर बंद
  • डॉलर सूचकांक में गिरावट: अमेरिकी शुल्क नीतियों में बदलाव से डॉलर दबाव में
  • आरबीआई बैठक पर नजर: निवेशकों की निगाहें 7 फरवरी की मौद्रिक नीति घोषणा पर
  • शेयर बाजार में तेजी: सेंसेक्स 1,397 अंक और निफ्टी 378 अंक चढ़ा

Rupees: मंगलवार 4 जनवरी 2025 को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीन पैसे की मजबूती दर्ज की और 87.08 (अस्थायी) पर बंद हुआ. सोमवार को यह 87.11 के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर था. रुपये को मजबूती तब मिली, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मेक्सिको और कनाडा पर शुल्क बढ़ोतरी को एक महीने के लिए टाल दिया. इसके चलते डॉलर सूचकांक 109.88 से गिरकर 108.47 पर आ गया और रुपये पर दबाव कम हुआ.

आरबीआई के हस्तक्षेप से मजबूत हो सकता है रुपया

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी के अनुसार, अमेरिकी व्यापार शुल्कों की अनिश्चितता के कारण रुपया अस्थिर रह सकता है. अगर चीन के साथ व्यापार युद्ध बढ़ता है, तो डॉलर फिर से मजबूत हो सकता है और निवेशक सुरक्षित संपत्तियों में पैसा लगाएंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप से रुपये को समर्थन मिल सकता है. निवेशक फिलहाल 5-7 फरवरी को होने वाली आरबीआई मौद्रिक नीति बैठक पर नजर बनाए हुए हैं.

दूसरे बाजारों पर प्रभाव

शेयर बाजार में उछाल: सेंसेक्स 1,397 अंक चढ़कर 78,583.81 पर पहुंचा. निफ्टी 378 अंक बढ़कर 23,739.25 पर बंद हुआ. ब्रेंट क्रूड 75.06 डॉलर प्रति बैरल पर रहा. एफआईआई ने 3,958.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

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क्या आगे रुपये में और सुधार होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आरबीआई रुपये की स्थिरता के लिए कदम उठाता है, तो इसमें और मजबूती आ सकती है. इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव भी रुपये की चाल को प्रभावित करेगा.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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