RBI: आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में हम अपनी खर्चों का हिसाब रखते हैं, बिल्कुल वैसे ही हमारी सरकारें भी अपना बजट संभालती हैं. हाल ही में रिजर्व बैंक (RBI) की एक रिपोर्ट आई है जिसने सबको थोड़ा चौंका दिया है. पिछले तीन सालों से तो सब कंट्रोल में था, लेकिन अब राज्यों का फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा बढ़कर उनकी कमाई (GDP) का 3.3% हो गया है. सीधे शब्दों में कहें तो, जितनी कमाई नहीं हो रही, उससे ज्यादा खर्च हो रहा है. लेकिन घबराने की बात नहीं है, क्योंकि यह पैसा कहीं फिजूलखर्ची में नहीं बल्कि भविष्य के लिए इन्वेस्ट हो रहा है. केंद्र सरकार राज्यों को 50 साल के लिए बिना ब्याज के लोन दे रही है ताकि वो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकें, और यही वजह है कि यह आंकड़ा थोड़ा ऊपर गया है.
क्या हम भारी कर्ज के बोझ तले दबे हैं?
कर्ज का नाम सुनते ही हम सबको टेंशन होने लगती है, पर यहां कहानी थोड़ी अलग है. अच्छी खबर यह है कि राज्यों पर जो कुल कर्ज का बोझ था, वह कम हुआ है. मार्च 2021 में यह बोझ GDP का 31% था, जो मार्च 2024 तक घटकर 28.1% पर आ गया है. हालांकि, मार्च 2026 तक इसके 29.2% तक जाने का अनुमान है, फिर भी RBI का कहना है कि सिचुएशन कंट्रोल में है. सरकारें अब फालतू के खर्चों को कम कर रही हैं और अपना ध्यान ऐसी जगहों पर लगा रही हैं जहां से लंबे समय में फायदा हो.
बढ़ती उम्र और घटती कमाई का क्या कनेक्शन है?
इस रिपोर्ट में एक बहुत ही दिलचस्प बात कही गई है कि राज्यों की उम्र उनकी हालत को तय कर रही है. जिन राज्यों में युवाओं की संख्या ज्यादा है, उनके पास तरक्की करने का एक गोल्डन चांस है क्योंकि वहां काम करने वाले हाथ ज्यादा हैं और टैक्स देने वाले लोग भी ज्यादा है. इसके उलट, जिन राज्यों की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, वहां की चुनौतियां बढ़ रही हैं. वहां टैक्स देने वाले कम हो रहे हैं और पेंशन या हेल्थकेयर जैसे खर्च बढ़ रहे हैं. यह एक बड़ा इशारा है कि अगर आज हम अपनी स्किल्स पर ध्यान नहीं देंगे, तो आने वाले समय में इकोनॉमी को संभालना मुश्किल हो जाएगा.
फ्यूचर के लिए क्या है गेम प्लान?
RBI ने साफ कर दिया है कि हर राज्य को अपनी जरूरत के हिसाब से प्लानिंग करनी होगी. राज्य जिनमें युवाओं की आबादी ज्यादा है, वे राज्य अपनी पूरी ताकत युवाओं की पढ़ाई और हेल्थ पर लगानी चाहिए ताकि वो देश की ग्रोथ में साथ दे सकें. वहीं जो राज्यों में सीनियर सिटीजन्स ज्यादा हैं, उन्हें अपनी कमाई के नए रास्ते ढूंढने होंगे और हेल्थकेयर सिस्टम को और मजबूत करना होगा. अंत में पूरी बात यह ही है कि आने वाले समय में हमें सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं, बल्कि उसे सही जगह लगाना भी सीखना होगा. 2025-26 के बजट में भी यही कोशिश दिख रही है कि फालतू खर्चे रोककर पैसा वहां लगाया जाए जहां से विकास के नए रास्ते खुलें.
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