COVID-19 : सिलिकॉन वैली में नौकरी से छंटनी, कर्मचारियों के वेतन में कटौती और नयी भर्तियों पर रोक की तैयारी

अमेरिका में भारतीय उद्यमियों और आईटी पेशेवरों के केंद्र सिलिकॉन वैली खुद को कोरोना वायरस महामारी के बाद की स्थितियों के लिए तैयार कर रहा है, जिसमें छंटनी, वेतन में कटौती और नयी भर्तियों पर रोक शामिल है.

वाशिंगटन : अमेरिका में भारतीय उद्यमियों और आईटी पेशेवरों के केंद्र सिलिकॉन वैली खुद को कोरोना वायरस महामारी के बाद की स्थितियों के लिए तैयार कर रहा है, जिसमें छंटनी, वेतन में कटौती और नयी भर्तियों पर रोक शामिल है. टॉप वेंचर निवेशक एम आर रंगास्वामी ने कहा कि गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी आईटी कंपनियों का दृष्टिकोण अलग हो सकता है, लेकिन कई स्टार्टअप या तो छंटनी करने की या वेतन में कटौती की तैयारी कर रहे हैं.

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रंगास्वामी ने सिलिकॉन वैली में स्टार्टअप के रुख के बारे में कहा कि वे सभी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनके पास कंपनी में 18 से 24 महीनों के लिए पर्याप्त नकदी हो. यह पैसा जुटाने के लिए एक बुरा समय है, क्योंकि अगर वे इस समय धनराशि जुटाने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें बहुत खराब मूल्यांकन मिलेगा.

उन्होंने कहा कि ऐसे में मुझे लगता है कि अगले महीने आप बे एरिया में बड़ी संख्या में बेरोजगारी के बारे में सुनेंगे, जैसा 2007, 2008 के बाद से नहीं हुआ है. यहां तक कि उस समय भी ऐसा नहीं हुआ था, लेकिन आप पहली बार 2000 के बाद इसे इतने लंबे समय तक देखेंगे. ये उसी तरह की स्थिति होगी. उन्होंने कहा कि सिलिकॉन वैली खुद स्टार्टअप को छंटनी के लिए प्रेरित कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि आधे सिलिकॉन वैली को बंद कर दिया जाएगा. इससे पांच फीसदी कर्मचारियों की संख्या प्रभावित हो सकती है या 10 फीसदी कार्यबल की छंटनी हो सकती है और लोगों के वेतन में 10 फीसदी की कटौती हो सकती है. रंगास्वामी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि आकाश गिर रहा है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि जो होने जा रहा है, वह काफी समय से नहीं हुआ है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों के लिए ऐसी बात नहीं कह सकते हैं. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि वे कुछ भी न करें, लेकिन ये स्टार्टअप समुदाय के बारे में है, जहां निश्चित रूप से छंटनी और वेतन में कमी होगी. रंगास्वामी ने कहा कि एच-1बी वीजा पर भारतीय आईटी पेशेवरों के बारे में कहा कि उनकी ज्यादा छंटनी नहीं हो सकता, क्योंकि वे पहले ही अपने व्यवसाय के लिए बहुत धनराशि बचा रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे पहले ही ऐसी नौकरियों में हैं, जहां वे ग्राहकों के पैसे बचा रहे हैं. इसलिए जब तक उनके व्यवसाय में बहुत अधिक गिरावट नहीं आएगी, इन लोगों की आवश्यकता बनी रहेगी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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