PM Fasal Bima Yojana: 24 जुलाई वाली डेडलाइन गई, अब इस तारीख तक करा सकेंगे फसल बीमा

फसल बीमा योजना को लेकर किसानों को राहत मिली है. खरीफ 2026 में बीमा की तारीख 16 अगस्त तक बढ़ी है और 9 अगस्त तक ऑप्ट-आउट कर सकेंगे.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर किसानों के लिए जरूरी अपडेट सामने आया है. किसानों की आपत्तियों के बाद राजस्थान सरकार ने खरीफ-2026 के लिए फसल बीमा की समय-सीमा बढ़ा दी है. 

अब राज्य के ऋणी और गैर-ऋणी किसान 16 अगस्त तक फसल बीमा करा सकेंगे. वहीं, जो किसान योजना से बाहर होना चाहते हैं, उनके लिए 9 अगस्त तक ऑप्ट-आउट का मौका दिया गया है.

कृषि आयुक्तालय की ओर से जारी नए आदेश में बीमित फसल के नाम में बदलाव की तारीख भी बढ़ाकर 14 अगस्त कर दी गई है. यानी किसानों के पास अब अपनी फसल और बीमा से जुड़ी जरूरी जानकारी ठीक कराने का भी समय है.

समय-सीमा क्यों बढ़ाई गई?

पहले किसानों के लिए ऑप्ट-आउट की आखिरी तारीख 24 जुलाई तय थी. परेशानी यह थी कि फसल बीमा योजना की अधिसूचना किसानों तक 27 जुलाई को पहुंची. ऐसे में कई किसानों के पास योजना में रहने या बाहर होने का फैसला लेने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा था. किसानों और किसान संगठनों ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से समय बढ़ाने की मांग की. इसके बाद सरकार ने पुरानी ऑप्ट-आउट प्रक्रिया को दोबारा खोलने का फैसला किया है.

भारतीय किसान संघ ने इसे किसानों के अधिकार से जुड़ा मामला बताया था. अब नए आदेश से किसानों को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है.

किसान बीमा कहां और कब करा सकते हैं?

राजस्थान के सभी जिलों में लागू नए आदेश के मुताबिक किसान 16 अगस्त तक फसल बीमा करा सकते हैं. इसके लिए ये विकल्प उपलब्ध हैं:

  • बैंक
  • सहकारी समिति
  • कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC
  • राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल

गैर-ऋणी किसानों के लिए एग्रीस्टैक आईडी जरूरी रहेगी. कृषि विभाग ने जिला अधिकारियों को योजना का प्रचार करने और ज्यादा से ज्यादा किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं.

किन किसानों को फसल बीमा का फायदा मिल सकता है?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मकसद प्राकृतिक आपदाओं और दूसरे तय जोखिमों से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक राहत देना है. इसके तहत अनाज, बाजरा, दालें, तिलहन और वार्षिक वाणिज्यिक व बागवानी फसलों को कवर किया जाता है. बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़, जलभराव, तूफान, चक्रवात, बिजली गिरने, कीट और बीमारियों जैसे जोखिमों से होने वाला नुकसान योजना के दायरे में आ सकता है.

हालांकि हर तरह का नुकसान बीमा के तहत नहीं आता. युद्ध, परमाणु जोखिम, दंगे, चोरी, जानबूझकर किया गया नुकसान और घरेलू या जंगली जानवरों से हुआ नुकसान इसमें शामिल नहीं है. इसके अलावा किसान को नुकसान की सूचना समय पर देनी होती है और बीमा में दर्ज फसल, दस्तावेज और बैंक खाते की जानकारी सही होनी चाहिए. गलत जानकारी या बीमा में दर्ज फसल की जगह दूसरी फसल बोने जैसी स्थिति में क्लेम अटक या खारिज हो सकता है. किसान संगठन ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन व्यक्तिगत फसल नुकसान पर क्लेम समेत कुछ अन्य मांगों के लंबित रहने की बात भी कही है.

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लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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