NSE NPO: निवेशकों का इंतजार खत्म! एनएसई के आईपीओ को इस महीने सेबी से मिल सकती है मंजूरी

NSE IPO: बहुप्रतीक्षित एनएसई आईपीओ को लेकर निवेशकों के लिए बड़ी खबर है. सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने संकेत दिया है कि एनएसई आईपीओ को इसी महीने अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल सकता है. सह-स्थान विवाद के बाद वर्षों से अटका एनएसई का आईपीओ अब निर्णायक मोड़ पर है. अगस्त 2024 में दोबारा आवेदन और 643 करोड़ के जुर्माने के बाद एनएसई ने कई सुधार किए हैं. सेबी की सख्ती, एआई सुदर्शन, सोशल मीडिया निगरानी और निवेशक सुरक्षा उपाय भी चर्चा में हैं.

By KumarVishwat Sen | January 10, 2026 9:24 PM

NSE IPO: बहुप्रतीक्षित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) को लेकर निवेशकों का इंतजार अब खत्म होता दिख रहा है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि एनएसई आईपीओ के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया बहुत एडवांस स्टेज में है और संभवतः इसी महीने के भीतर इसे मंजूरी मिल सकती है.

सेबी चेयरमैन ने नहीं बताई डेट

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “मुझे लगता है कि हम एनएसई आईपीओ के लिए एनओसी जारी करने के बहुत एडवांस स्टेज में हैं. शायद इसी महीने के भीतर जारी हो सकता है,” हालांकि, उन्होंने कोई निश्चित तारीख नहीं बताई. उनके इस बयान के बाद यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि वर्षों से अटके एनएसई आईपीओ को जल्द ही हरी झंडी मिल सकती है.

वर्षों से अटका है एनएसई का आईपीओ

एनएसई कई वर्षों से अपनी सार्वजनिक लिस्टिंग के लिए नियामक मंजूरी का इंतजार कर रहा है. सह-स्थान विवाद और उससे जुड़े शासन संबंधी मुद्दों के कारण एनएसई का आईपीओ लंबे समय तक लटका रहा. एनएसई ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल किया था. इसके बाद एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक अनुचित पहुंच के आरोप सामने आए, जिनमें कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को सिस्टम में अनुचित लाभ मिलने की बात कही गई. इन्हीं कारणों से नियामकीय जांच शुरू हुई और आईपीओ प्रक्रिया ठप पड़ गई.

अगस्त 2024 में दोबारा किया गया आवेदन

कई साल की देरी के बाद एनएसई ने अगस्त 2024 में एक बार फिर अपने आईपीओ को आगे बढ़ाने के लिए सेबी से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया. इसके बाद अक्टूबर 2024 में एनएसई ने ट्रेडिंग एक्सेस प्वाइंट (टीएपी) आर्किटेक्चर और नेटवर्क कनेक्टिविटी मामले में सेबी को 643 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा कर इस विवाद का निपटारा किया. यह जुर्माना एक्सचेंज और उसके शीर्ष अधिकारियों की कथित कमियों की जांच के तहत लगाया गया था, जिसमें यह सामने आया था कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को सिस्टम तक अनुचित पहुंच मिली थी.

एनएसई में बड़े सुधार और बोर्ड का पुनर्गठन

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही लागू करने की सेबी की योजना पर प्रकाश डालते हुए तुहीन कांत पांडेय ने कहा कि एनएसई ने पिछले कुछ समय में कई महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम उठाए हैं. इनमें वरिष्ठ प्रबंधन में बदलाव, बोर्ड का पुनर्गठन, अनुपालन ढांचे को मजबूत करना और पुराने नियामकीय मामलों का निपटारा शामिल है. उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक्सचेंज भविष्य में अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और निवेशकों के हितों के अनुरूप काम करे.

सोशल मीडिया पर निगरानी

तुहीन कांत पांडेय ने यह भी बताया कि सेबी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नजर रख रहा है. उन्होंने कहा, “हम सोशल मीडिया पर नजर रख रहे हैं और जहां भी हमें उल्लंघन दिखाई देता है, हम प्लेटफार्मों से इसे हटाने के लिए कह रहे हैं.” उनके मुताबिक हाल के महीनों में 1,00,000 से अधिक ऐसे पोस्ट हटाए जा चुके हैं, जिनमें बाजार से जुड़ी भ्रामक या नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्री पाई गई.

एआई सुदर्शन से हो रही ऑनलाइन निगरानी

सेबी के चेयरमैन तुहीन कांत पांडेय ने बताया कि इस पहल का एक प्रमुख स्तंभ ‘एआई सुदर्शन’ है. यह सेबी द्वारा विकसित एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल है, जिसका इस्तेमाल ऑनलाइन बाजार से जुड़े उल्लंघनों को स्कैन करने और पहचानने के लिए किया जाता है. यह टूल नियामकों को भ्रामक, फर्जी या अवैध सामग्री का पता लगाने में मदद करता है, ताकि समय रहते त्वरित कार्रवाई की जा सके.

सेबी नाम और लोगो के दुरुपयोग पर सख्ती

सेबी के नाम और लोगो का दुरुपयोग करने वाले धोखेबाजों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए तुहीन कांत पांडेय ने कहा कि नियामक ने देशभर में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ा दिया है. उन्होंने बताया कि सेबी ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों सहित नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध किया है. कई राज्यों ने पहले ही अधिकारियों को नामित कर दिया है और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं.

निवेशकों के लिए सेबी चेक टूल लॉन्च

निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी ने सेबी चेक नामक एक नया टूल लॉन्च किया है. यह टूल निवेशकों को मात्र 30 सेकंड के भीतर यह सत्यापित करने की सुविधा देता है कि कोई बैंक खाता, यूपीआई हैंडल या क्यूआर कोड प्रतिभूति बाजार लेनदेन के लिए आधिकारिक रूप से स्वीकृत है या नहीं. यह टूल 1 अक्टूबर 2025 से सेबी के मोबाइल ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध है. इसका उद्देश्य निवेशकों को फर्जी ऐप्स और धोखाधड़ी वाले खातों से बचाना है. उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे किसी भी राशि को ट्रांसफर करने से पहले सेबी चेक का उपयोग जरूर करें. उन्होंने कहा, “यदि पैसा धोखाधड़ी वाले खातों में भेजा जाता है, तो निवेशकों को कोई सुरक्षा नहीं मिलती. जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण है.”

डेरिवेटिव बाजार पर फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं

बाजार विनियमन को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सेबी की डेरिवेटिव सेगमेंट में किसी भी तरह का नया बदलाव करने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2024, मई 2025 और दिसंबर 2025 में कई उपाय लागू किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा, “हम अभी कार्यान्वयन के बाद के आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं. पर्याप्त डेटा उपलब्ध होने पर अगली कार्रवाई तय करेंगे। इस समय किसी बदलाव का इरादा नहीं है.”

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गोल्ड निवेश और नई जागरूकता रणनीति

सोने से जुड़े निवेश उत्पादों पर उन्होंने कहा कि गोल्ड ईटीएफ जैसे विनियमित विकल्प पहले से मौजूद हैं और अच्छी तरह काम कर रहे हैं. हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (ईजीआर) भी मान्य हैं, लेकिन कुछ परिचालन संबंधी दिक्कतों के कारण उनका उपयोग सीमित रहा है. इसके साथ ही उन्होंने सेबी की निवेशक जागरूकता रणनीति में बदलाव की घोषणा की. जुलाई में कराए गए एक सर्वे के आधार पर सेबी ने पाया कि बहुभाषी और विविध प्रारूपों में चलाए गए अभियान अधिक प्रभावी होते हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में निवेशक जागरूकता अभियान बहुभाषी, बहु-एजेंसी और मल्टीमीडिया आधारित होंगे, जिनमें युवा निवेशकों को जोड़ने के लिए शॉर्ट वीडियो, रील और डिजिटल फॉर्मेट का इस्तेमाल किया जाएगा.

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