नौकरी छोड़ते समय सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन नोटिस पीरियड को लेकर होता है. इसी दौरान अगर कर्मचारी को छुट्टी चाहिए तो सवाल उठता है कि क्या वह अपनी बची हुई लीव इस्तेमाल कर सकता है? जवाब सीधा है- छुट्टी मांगी जा सकती है, लेकिन सिर्फ लीव बैलेंस होने से छुट्टी लेना कर्मचारी का पक्का अधिकार नहीं बन जाता.
अगस्त 2026 में Labour Law Reporter (LLR) के विश्लेषण के मुताबिक, नोटिस पीरियड में छुट्टी देने या न देने का फैसला कर्मचारी के कॉन्ट्रैक्ट, कंपनी की लीव पॉलिसी, सर्विस रूल्स, स्टैंडिंग ऑर्डर्स और लागू कानून पर निर्भर करता है.
क्या नोटिस पीरियड में छुट्टी ले सकते हैं?
हां, कर्मचारी छुट्टी के लिए आवेदन कर सकता है. लेकिन छुट्टी को पहले सैंक्शन यानी मंजूर कराना जरूरी है. सिर्फ यह सोचकर कि आपके पास काफी लीव बची हुई है, बिना मंजूरी के ऑफिस से गायब होना सही नहीं है. LLR के मुताबिक, कर्मचारी को छुट्टी के लिए लिखित में आवेदन करना चाहिए और अप्रूवल लेना चाहिए. अगर कंपनी जवाब नहीं देती है तो इसे अपने आप छुट्टी की मंजूरी मान लेना ठीक नहीं होगा. बिना अनुमति छुट्टी लेने पर स्थिति बिगड़ सकती है और कंपनी के नियमों के मुताबिक सैलरी कटने या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
क्या छुट्टी लेने से नोटिस पीरियड बढ़ जाएगा?
हर मामले में नोटिस पीरियड बढ़ना जरूरी नहीं है. अगर कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट या सर्विस रूल्स में छुट्टी और नोटिस पीरियड को साथ चलने से रोकने वाला कोई नियम नहीं है, तो मंजूर छुट्टी सामान्य तौर पर नोटिस पीरियड के अंदर ही गिनी जा सकती है. दिल्ली हाई कोर्ट के Ghanshyam v. DMRC (2007) मामले में भी यही बात सामने आई थी कि अगर नोटिस क्लॉज छुट्टी को रोकता नहीं है, तो मंजूर छुट्टी नोटिस पीरियड के साथ चल सकती है. हालांकि, हर जगह नियम एक जैसे नहीं हैं. CAMPCO Ltd. v. B. Vishnu Murthy (2022) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सर्विस रूल्स को अहम माना, जिनमें छुट्टी और नोटिस पीरियड को एक साथ चलाने पर रोक थी.
बिना मंजूरी छुट्टी ली तो क्या होगा?
यहां सैंक्शन लीव और अनऑथराइज्ड लीव के बीच फर्क समझना जरूरी है. बिना मंजूरी लंबे समय तक गैरहाजिर रहने या छुट्टी खत्म होने के बाद भी वापस न आने को लेकर अदालतों ने कई मामलों में कार्रवाई की अनुमति दी है. State of Punjab v. P.L. Singla (2008) में सुप्रीम कोर्ट ने अनधिकृत अनुपस्थिति या मंजूर छुट्टी से ज्यादा समय तक गैरहाजिर रहने को मिसकंडक्ट माना. वहीं Krushnakant B. Parmar v. Union of India (2012) में यह भी देखा गया कि अनुपस्थिति जानबूझकर थी या उसके पीछे बीमारी जैसी वास्तविक वजह थी. इसलिए मेडिकल इमरजेंसी होने पर कर्मचारी को तुरंत कंपनी को जानकारी देने और जरूरी दस्तावेज देने चाहिए.
छुट्टी लेने से पहले क्या चेक करें?
नौकरी छोड़ने से पहले ये चीजें जरूर देख लें:
- अपॉइंटमेंट लेटर में नोटिस पीरियड की शर्तें क्या हैं.
- कंपनी की लीव पॉलिसी क्या कहती है.
- सर्विस रूल्स या स्टैंडिंग ऑर्डर्स में छुट्टी को लेकर क्या नियम हैं.
- क्या छुट्टी और नोटिस पीरियड को एक साथ चलाने पर रोक है.
- छुट्टी की मंजूरी लिखित में मिली है या नहीं.
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