पेंसिल शॉर्पनर और गीले गुड़ पर जीएसटी दर में कटौती, राज्यों को बकाया क्षतिपूर्ति उपकर का किया जाएगा भुगतान

जीएसटी परिषद की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमएण ने कहा कि राब का जीएसटी रेट कम किया जा रहा है. अगर खुला राब लिया जाता है, तो उसमें रेट शून्य जीएसटी लगेगा और अगर यही प्री पैकेट और लेबल्ड होगा, तो उसमें 5 फीसदी जीएसटी लगेगा.

नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि राज्यों को जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) के तहत 16,982 करोड़ रुपये का बकाया क्षतिपूर्ति उपकर का भुगतान आज से शुरू कर दिया जाएगा. दूसरे शब्दों में जून का जीएसटी मुआवजे का पूरा बकाया कुल 16,982 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद ने गीले गुड़, पेंसिल शॉर्पनर और कुछ ट्रैकिंग उपकरणों पर जीएसटी घटाने का फैसला किया है. इसके साथ ही, टिकाऊ कंटेनरों पर लगे टैग ट्रैकिंग डिवाइस या डेटा लॉगर्स पर जीएसटी में कुछ शर्तों के अधीन 18 फीसदी से घटाकर शून्य किया गया है.

जीएसटी परिषद की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमएण ने कहा कि राब का जीएसटी रेट कम किया जा रहा है. अगर खुला राब लिया जाता है, तो उसमें रेट शून्य जीएसटी लगेगा और अगर यही प्री पैकेट और लेबल्ड होगा, तो उसमें 5 फीसदी जीएसटी लगेगा. पेंसिल शार्पनर में जीएसटी दर को घटाकर 18 फीसदी से 12 फीसदी किया गया है.

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि जीएसटी परिषद ने नियत तिथि के बाद वार्षिक जीएसटी रिटर्न भरने पर विलंब शुल्क को युक्तिसंगत बनाने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि पान मसाला और गुटखा उद्योग में हो रही कर चोरी पर लगाम लगाने के लिए ओडिशा के वित्त मंत्री निरंजन पुजारी की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह (जीओएम) की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई. इस बैठक में सीतारमण के अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों और विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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