Monthly Savings Habit: अक्सर हमारे घरों में ऐसा होता है कि सैलरी आती है, खर्च कंट्रोल में रहते हैं और सब कुछ सामान्य लगता है. लेकिन तभी अचानक एक बड़ा खर्च सामने आ जाता है. जैसे अचानक फोन खराब हो जाना, इंश्योरेंस प्रीमियम, कार रिपेयर या कोई फैमिली फंक्शन हो जाना, एक ही महीने में बड़ा भुगतान करना मुश्किल हो जाता है और लोग इसी मजबूरी में क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का सहारा ले लेते हैं. हैरानी की बात यह है कि ये खर्च अचानक नहीं होते, हमें पहले से पता होता है कि ये आने वाले हैं. लेकिन पहले से तैयारी नहीं कर के रखने की तो हमारी आदात है और इसी आदत को बदलने के लिए आज हम आपको कुछ आसान तरीके बतानें जा रहे है.
सिंकिंग फंड आखिर होता क्या है?
सिंकिंग फंड एक ऐसी आसान आदत है, जिसमें हम आने वाले बड़े खर्च के लिए हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा अपनी सैलरी से अलग रखते हैं. यह न तो इमरजेंसी फंड है और न ही कोई निवेश योजना है. यह सिर्फ एक प्लानिंग का तरीका है, जिससे आप अपने भविष्य के खर्च को आज से संभाल सकते हैं. इसका मतलब यह है की जब मुसीबत आये तो आप किसी से उधार, लोन या क्रेडिट कार्ड लेने के बजाये पहले से तैयार रहे.
यह तरीका लोन से बेहतर क्यों है?
असल समस्या पैसे की नहीं, टाइमिंग की होती है. जब साल का 60,000 रुपये एक साथ देना होता है, तो हमें भारी लगता है, लेकिन वही रकम अगर 10 महीनों में बांट दी जाए तो आसान हो जाती है. लोन लेकर हम भुगतान को आगे बढ़ाते हैं और ब्याज देते हैं, जबकि सिंकिंग फंड में हम भुगतान को पहले से बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के फैला देते हैं.
पैसा कहां रखें ताकि टेंशन न हो?
सिंकिंग फंड का पैसा ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके. सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड जैसे सुरक्षित विकल्प इसके लिए सही रहते हैं. इसे रोजमर्रा के खर्च वाले अकाउंट से अलग रखना जरूरी है, ताकि पैसा गलती से खर्च न हो जाए.
इससे जिंदगी में क्या बदलाव आता है?
जब पहली बार कोई बड़ा बिल बिना लोन लिए आराम से चुकता होता है, तब समझ आता है कि दिक्कत खर्च में नहीं, तैयारी में होती थी. धीरे-धीरे लोन और क्रेडिट कार्ड पर निर्भरता कम होने लगती है और फाइनेंशियल लाइफ ज्यादा स्थिर महसूस होती है.
ये भी पढ़ें: क्रेडिट कार्ड है या छुपा हुआ जाल? एक गलती और जेब पर पड़ेगा भारी वार
