Healthy Food: फलों से कहीं अधिक आसानी से मिल जाते हैं कुरकुरे, हेल्दी फूड पर सीईए ने जताई चिंता

Healthy Food: भारत में फल खाने की आदतों में गिरावट और पैकेज्ड कुरकुरे स्नैक्स की बढ़ती उपलब्धता पर चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने चिंता जताई है. रिपोर्ट के अनुसार लोग हेल्दी फूड की बजाय अधिक आसानी से मिलने वाले प्रोसेस्ड स्नैक्स का सेवन कर रहे हैं, जिससे पोषण की कमी और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं. यह बदलाव न केवल स्वास्थ्य पर असर डालता है, बल्कि देश की खाद्य आदतों और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण संकेत देता है.

Healthy Food: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल (ईएसी-पीएम) के चेयरपर्सन प्रो एस महेंद्र देव ने भारत में बदलते फूड कंजम्पशन पैटर्न पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि आज मार्केट में कुरकुरे, चिप्स और प्रोसेस्ड स्नैक्स, फलों और सब्जियों की तुलना में ज्यादा आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे लोगों को हेल्दी फूड से दूर धकेला जा रहा है.

हेल्दी फूड की उपलब्धता पर उठे सवाल

मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन की ओर से आयोजित सेमिनार में बोलते हुए सीईए ने कहा कि हेल्दी फूड के ऑप्शन, खासकर फल, सब्जियां और न्यूट्रिशस स्नैक्स, आम लोगों को आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे. उन्होंने कहा कि जब मार्केट में प्रोसेस्ड स्नैक्स हर जगह मिल जाएंगे और हेल्दी फूड कम हो जाएंगे, तो लोगों का झुकाव अनहेल्दी फूड की ओर बढ़ेगा.

सीईए ने दी चेतावनी

सीईए ने चेतावनी दी कि इस असंतुलन को नजरअंदाज करना मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है. उनके अनुसार, फलों और सब्जियों के मुकाबले चिप्स और कुरकुरे गांवों में भी आसानी से मिल जाते हैं, जो पोषण संबंधी असमानता को और बढ़ाता है.

फूड कंजम्पशन पैटर्न में बड़ा बदलाव

पिछले एक दशक में लोगों के खाने-पीने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है. आधिकारिक सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए प्रो. देव ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कुल खाने की खपत में प्रोसेस्ड फूड और बेवरेज का हिस्सा 21% है. शहरी क्षेत्रों में यह हिस्सा 25% से भी अधिक होने का अनुमान है. इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में अनाज और फलों का हिस्सा मात्र 10% है, जो बेहद कम है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की खपत तेजी से बढ़ रही है, जबकि प्राकृतिक और पौष्टिक खाने का हिस्सा घट रहा है.

इंडस्ट्री से संवाद और हेल्दी स्नैक्स की मांग

सीईए ने उद्योग जगत से इस दिशा में जागरूकता और सुधार की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री को यह समझना होगा कि बाजार सिर्फ स्वाद पर नहीं, बल्कि सेहत पर भी ध्यान दे. उनके अनुसार, हेल्दी स्नैक्स की बेहतर सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए इंडस्ट्री से बात करना जरूरी है. उन्होंने विशेष रूप से कामकाजी पुरुषों और महिलाओं का उल्लेख किया, जिनकी व्यस्त दिनचर्या उन्हें घर का खाना बनाने की अनुमति नहीं देती और वे अनचाहे तौर पर प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर हो जाते हैं.

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पॉलिसी इंटरवेंशन की संभावनाएं

उनसे जब पूछा गया कि क्या सरकार इस क्षेत्र में किसी पॉलिसी इंटरवेंशन की तैयारी कर रही है, तो महेंद्र देव ने कहा कि फिलहाल फोकस लोगों को शिक्षित करने और इंडस्ट्री से संवाद बढ़ाने पर रहेगा. उन्होंने माना कि उपभोक्ताओं को हेल्दी विकल्प चुनने की जानकारी देना इस समस्या का पहला समाधान है. सीईए ने यह भी कहा कि भारत की तेज गति से बदलती अर्थव्यवस्था को देखते हुए उपभोक्ता बास्केट में समय-समय पर बेस रिवीजन की जरूरत है, ताकि नीति निर्माण वास्तविक स्थिति पर आधारित हो सके.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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