एक साल में 1500 करोड़ का किनले सोडा गटक गए लोग, कोका-कोला ने कही ये बात

Kinley Soda Sale: कोका-कोला की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में किनले सोडा की सालाना बिक्री 1,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई. ब्रांड ने टियर-2/3 शहरों और ग्रामीण बाजारों में भी अपनी पकड़ मजबूत की, जिससे इसकी लोकप्रियता और मांग तेजी से बढ़ी.

Kinley Soda Sale: भारत के लोग पेय पदार्थों में कोल्ड ड्रिंक्स के अलावा सॉफ्ट ड्रिंक लेने के बड़े शौकीन हैं. इसी का नतीजा है कि एक साल में भारत के लोग करीब 1500 करोड़ रुपये से अधिक किनले सोडा गटक गए. किनले सोडा बनाने वाली कंपनी कोका-कोला ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी ने किनले सोडा की बिक्री से वित्त वर्ष 2023-24 में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त किया है. यह न सिर्फ कंपनी की मजबूत ब्रांडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी को दर्शाता है, बल्कि भारत में सोडा कैटेगरी की बढ़ती लोकप्रियता को भी रेखांकित करता है.

कोका-कोला ने किनले सोडा का किया विस्तार

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोका-कोला इंडिया ने इस वर्ष किनले ब्रांड को लेकर एक रणनीतिक विस्तार किया. इसमें न केवल ब्रांडिंग पर जोर दिया गया है, बल्कि रूरल और टियर-2/3 शहरों में इसकी उपलब्धता को भी बढ़ाया गया. इसका प्रभाव यह रहा कि किनले सोडा ने मेट्रो शहरों के साथ-साथ छोटे बाजारों में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत किया.

उपभोक्ताओं में सोडा की मांग बढ़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं में हेल्थ अवेयरनेस बढ़ने के बावजूद सोडा जैसे उत्पादों की मांग बनी हुई है. खासकर, जब वह खाने के साथ या गर्मी के मौसम में कोल्ड ड्रिंक के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं. कोका-कोला ने इस मांग को समझते हुए अपने मार्केटिंग कैम्पेन्स को रीजनल स्वाद और संस्कृति के अनुरूप ढाल दिया, जिससे यह आम लोगों के बीच एक जाना-पहचाना नाम बन गया.

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कंपनी ने प्रचार पर दिया जोर

कोका-कोला ने ‘किनले क्लब सोडा’ के नाम से कई शहरों में टीवी और डिजिटल माध्यमों से प्रचार किया, जिसमें युवाओं और पारिवारिक उपभोक्ताओं को लक्ष्य बनाया गया. इसके अलावा, होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेक्टर में भी किनले की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि यही रफ्तार बनी रही, तो अगले कुछ सालों में किनले भारत में कोका-कोला का एक प्रमुख राजस्व स्रोत बन सकता है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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