NSE IPO: शेयर बाजार में इन्वेस्ट करने वालों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), जल्द ही अपना IPO (Initial Public Offering) लाने जा रहा है. ताजा जानकारी के मुताबिक, सरकार अब सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) के साथ बातचीत कर रही है ताकि वे इस IPO में अपनी हिस्सेदारी बेच सकें.
NSE का यह IPO पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) होगा. इसका मतलब है कि एक्सचेंज नए शेयर जारी नहीं करेगा, बल्कि पुराने शेयरधारक ही अपने शेयर जनता को बेचेंगे.
कौन-कौन बेच रहा है अपनी हिस्सेदारी?
NDTV Profit की रिपोर्ट के अनुसार, NSE में लगभग एक-तिहाई हिस्सा सरकारी कंपनियों के पास है. सूत्रों के अनुसार, 27 अप्रैल की समयसीमा (RFP Deadline) से पहले कई सरकारी कंपनियां अपनी हिस्सेदारी कम करने के लिए आवेदन देने की प्रक्रिया में हैं.
अगर बड़े शेयरधारकों की बात करें, तो LIC इसमें सबसे आगे है, जिसकी हिस्सेदारी 10.72% है. इसके अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन (4.44%), SBI कैपिटल मार्केट्स (4.33%) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (3.23%) जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं. सेबी (SEBI) के नियमों के मुताबिक, 10,000 करोड़ रुपये से बड़े IPO में कम से कम 2.5% हिस्सेदारी बेचना जरूरी है, लेकिन NSE करीब 4 से 4.5% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा है.
कब तक आएगा यह मेगा IPO?
बाजार के जानकारों और सूत्रों की मानें तो NSE जून के अंत तक अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा कर सकता है. NSE के बोर्ड ने पहले ही 6 फरवरी, 2026 को इस IPO के लिए मंजूरी दे दी थी. फिलहाल एक्सचेंज के पास लगभग 1.91 लाख शेयरहोल्डर हैं. यह IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े इश्यू में से एक हो सकता है, क्योंकि NSE की वैल्यूएशन और मार्केट में उसकी पकड़ बहुत मजबूत है.
इन्वेस्टर्स के लिए क्या है जरूरी नियम?
अगर आप इस IPO में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो एक खास नियम जान लेना जरूरी है. जो शेयरहोल्डर (जैसे LIC या SBI) इस ‘ऑफर फॉर सेल’ के जरिए अपने शेयर बेच रहे हैं, वे खुद एक इन्वेस्टर के तौर पर इस IPO में नए शेयर नहीं खरीद पाएंगे. यह नियम ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए होता है.
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