CRISIL Ratings Bank Report: भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए आने वाले दो साल काफी उम्मीद भरे नजर आ रहे हैं. रेटिंग एजेंसी CRISIL Ratings की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2027 तक बैंकों का फंसा हुआ कर्ज यानी ग्रॉस NPA (Non-Performing Assets) 2.0% से 2.2% के बीच रहने का अनुमान है. यह आंकड़ा मार्च 2026 के ऐतिहासिक निचले स्तर (2.0%) के बेहद करीब है. आसान शब्दों में कहें तो, चुनौतियों के बावजूद भारतीय बैंकों की सेहत बिगड़ने वाली नहीं है.
बड़े कॉर्पोरेट्स कैसे बने बैंकों की ढाल?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों के कुल कर्ज का 36% हिस्सा बड़ी कंपनियों (कॉर्पोरेट सेक्टर) के पास है. ताज्जुब की बात यह है कि गैस की बढ़ती कीमतों, कच्चे तेल के महंगे होने और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के बाद भी यह सेक्टर मजबूत खड़ा है. मार्च 2027 तक कॉर्पोरेट NPA 1.2% से 1.3% के आसपास रहने की उम्मीद है. इसका मुख्य कारण कंपनियों की सुधरी हुई आर्थिक स्थिति है. एक दशक पहले जहां कंपनियों की कमाई और कर्ज का अनुपात कमजोर था, वहीं अब यह काफी बेहतर है. CRISIL के स्ट्रेस टेस्ट में शामिल 30 सेक्टरों में से 23 पर मौजूदा वैश्विक तनाव (पश्चिम एशिया संघर्ष) का कोई खास असर नहीं पड़ेगा.
क्या MSME सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव?
छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) के लिए राह थोड़ी कठिन हो सकती है. कुल बैंक कर्ज का 19% हिस्सा रखने वाले इस सेक्टर का NPA इस साल 3.4% से 3.6% तक जा सकता है. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की वजह से कच्चा माल महंगा हुआ है और सप्लाई चेन में दिक्कतें आई हैं, जिससे छोटे व्यापारियों की पूंजी पर दबाव बढ़ा है. हालांकि, सरकार की RELIEF स्कीम और क्रेडिट गारंटी योजनाओं से इस तनाव को कम करने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा, बैंकों ने अब लोन देने के तरीकों (Underwriting) में काफी सुधार किया है, जिससे जोखिम कम हुआ है.
पर्सनल और होम लोन का क्या हाल है?
रिटेल लोन यानी आम जनता द्वारा लिए गए कर्ज का हिस्सा 33% है. इसमें होम लोन सबसे सुरक्षित है, जिसका NPA महज 1% के आसपास रहने का अनुमान है. हालांकि, बिना गारंटी वाले लोन (Unsecured Loans) जैसे पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड पर नजर रखने की जरूरत है. इनका NPA फिलहाल 1.8% के करीब है. अच्छी बात यह है कि बैंकों ने हाल ही में सतर्कता बढ़ा दी है, जिससे नए लोन के डूबने का खतरा कम हो गया है.
आगे की राह और चुनौतियां?
खेती-किसानी (Agriculture) के लिए दिया गया 12% कर्ज पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर है. इस साल 11 साल में पहली बार सामान्य से कम बारिश की आशंका है, जो बैंकों के लिए एक चिंता का विषय हो सकती है. अंत में, बैंकों की सफलता इस बात पर टिकी है कि मिडिल ईस्ट का तनाव कितना लंबा खिंचता है और सरकार MSME सेक्टर को कितनी तेजी से मदद पहुंचाती है. फिलहाल, भारतीय बैंकों का आधार मजबूत है और वे किसी भी बड़े झटके को झेलने के लिए तैयार दिख रहे हैं.
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