Indian Financial Market: भारत के फाइनेंशियल मार्केट्स के लिए यह हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. रुपये में कमजोरी, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और शेयर बाजार में गिरावट ने इन्वेस्टर्स और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी. इसके बीच सरकार की तरफ से भी खर्च कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की गई.
रुपया 96 के पार क्यों फिसला?
इस हफ्ते भारतीय रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चला गया. इसकी बड़ी वजह विदेशी इन्वेस्टर्स का लगातार पैसा निकालना और कच्चे तेल की महंगी होती कीमतें रहीं. जब तेल महंगा होता है तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है. इसी वजह से बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला.
पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों हुआ?
सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बढ़ा था. लंबे समय से कीमतें स्थिर रखने के कारण कंपनियों को नुकसान हो रहा था, जिसे कम करने के लिए यह फैसला लिया गया.
मोदी ने क्या सलाह दी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ्ते लोगों और कंपनियों से फ्यूल की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की. उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स अपनाई जाएं. इसके अलावा गैर-जरूरी विदेश यात्राएं और डेस्टिनेशन वेडिंग टालने की भी सलाह दी गई. उन्होंने यह भी कहा कि लोग कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें, ताकि इंपोर्ट बिल कम हो सके.
शेयर बाजार में इतनी गिरावट क्यों आई?
इस दौरान शेयर बाजार में भी तेज गिरावट देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स हफ्ते के दौरान करीब 2000 अंक तक टूट गया, जबकि एक दिन में ही 1450 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई. निफ्टी 50 भी 23,400 के नीचे फिसल गया. हालांकि हफ्ते के अंत तक थोड़ी रिकवरी देखने को मिली. विदेशी इन्वेस्टर्स की बिकवाली और महंगे तेल ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया.
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