एक बैरल का कच्चा तेल आखिर कितना देता है पेट्रोल-डीजल, यहां जानें पूरा हिसाब

Crude Oil Barrel Capacity: कच्चे तेल का बैरल आखिर कितना बड़ा होता है? और उससे कितना पेट्रोल-डीजल निकलता है? आसान शब्दों में समझें कच्चे तेल का पूरा हिसाब.

Crude Oil Barrel Capacity: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर इस वक्त पूरी दुनिया पर दिख रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा पेट्रोल-डीजल को लेकर हो रही है, क्योंकि कच्चे तेल की सप्लाई पर थोड़ा सा असर भी सीधे फ्यूल की कीमतों को प्रभावित करता है. कई देशों ने तेल के इस्तेमाल को लेकर सलाह जारी की है, लेकिन भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल कच्चे तेल और फ्यूल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. 

इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल अक्सर आता है कि आखिर जिस कच्चे तेल की कीमतें हर दिन खबरों में रहती हैं, उसका हिसाब कैसे लगाया जाता है? एक बैरल में कितना तेल होता है और उससे कितना पेट्रोल-डीजल बनता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं. 

एक बैरल में कितना तेल होता है?

कच्चे तेल की माप बैरल में की जाती है और इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत भी प्रति बैरल तय होती है. एक बैरल में करीब 159 लीटर कच्चा तेल होता है. अगर अमेरिकी गैलन में समझें तो एक बैरल में 42 अमेरिकी गैलन तेल आता है. यही मात्रा लीटर में बदलने पर लगभग 159 लीटर होती है. यही यूनिट दुनिया भर में तेल कारोबार के लिए इस्तेमाल की जाती है. 

एक बैरल से कितना पेट्रोल-डीजल निकलता है?

159 लीटर कच्चे तेल को रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है. इसके बाद इससे अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पाद निकलते हैं. एक बैरल तेल से औसतन:

  • 60 से 70 लीटर पेट्रोल
  • 45 से 50 लीटर डीजल
  • 15 से 20 लीटर एविएशन फ्यूल
  • करीब 5 से 6 किलो एलपीजी

निकाली जाती है. मात्रा तेल की क्वालिटी और रिफाइनरी की तकनीक पर भी निर्भर करती है. 

कच्चे तेल से और क्या-क्या बनता है?

कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है. इससे कई जरूरी चीजें बनती हैं, जिनका रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होता है. इनमें शामिल हैं:

  • एलपीजी गैस
  • ग्रीस
  • पेट्रोलियम जेली
  • डामर
  • प्लास्टिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल

यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर कई दूसरे सेक्टर पर भी पड़ता है. 

क्या होता है प्रोसेसिंग गेन?

यह एक दिलचस्प प्रक्रिया है. जब रिफाइनरी में 159 लीटर कच्चा तेल डाला जाता है, तो प्रोसेसिंग के बाद कुल उत्पादों की मात्रा 170 लीटर तक पहुंच सकती है. इसे प्रोसेसिंग गेन कहा जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रिफाइनिंग के दौरान तेल की डेंसिटी बदलती है और कुछ केमिकल प्रोसेस के कारण उसका वॉल्यूम बढ़ जाता है. यानी मात्रा बढ़ती दिखती है, लेकिन कुल ऊर्जा वही रहती है. 

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लेखक के बारे में

Published by: Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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