First Petrol Pump In India: आज पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम हमारी जेब पर भारी पड़ रहे हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब भारत में एक भी पेट्रोल पंप नहीं था, तब गाड़ियां कैसे चलती थीं? आइए जानते हैं देश के पहले फ्यूल स्टेशन की दिलचस्प कहानी, जो आज के समय से बिल्कुल अलग थी.
पहला पेट्रोल पंप कब और कहां खुला था?
भारत के पहले पेट्रोल पंप की शुरुआत साल 1928 में हुई थी. इसे मुंबई (तब बॉम्बे) के ह्यूजेस रोड पर खोला गया था, जिसे आज एनी बेसेंट रोड के नाम से जाना जाता है. इस ऐतिहासिक स्टेशन को ‘बर्मा शेल’ कंपनी ने शुरू किया था. आज के आधुनिक स्टेशनों के मुकाबले यह बहुत साधारण था. वहां सिर्फ दो हाथ से चलने वाले पंप (डिस्पेंसर) थे और तेल जमा करने की क्षमता भी महज 900 से 1,200 लीटर ही थी.
तब विदेशों से कैसे आता था पेट्रोल?
आजादी से पहले भारत में तेल रिफाइनरियां नहीं थीं, इसलिए पेट्रोल को समुद्री जहाजों के जरिए बर्मा, ईरान और पश्चिम एशिया से मंगाया जाता था. बंदरगाह पर पहुंचने के बाद, तेल को लोहे के ड्रमों में भरा जाता और फिर बैलगाड़ियों या ट्रकों के जरिए पंप तक पहुंचाया जाता था. गाड़ियों में तेल भरने के लिए भी कर्मचारी हाथ से चलने वाले पंप का इस्तेमाल करते थे.
क्या सच में चंद पैसों में मिलता था तेल?
साल 1928 में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत सिर्फ 1 से 2 आना (यानी लगभग 6 से 12 पैसे) थी. इस हिसाब से 1 रुपये में 16 लीटर से ज्यादा पेट्रोल आ जाता था. हालांकि, यह सिर्फ सुनने में सस्ता लगता है, क्योंकि उस दौर में एक आम इंसान की रोज की कमाई भी 1 रुपये से कम होती थी. इसलिए उस समय के हिसाब से पेट्रोल काफी महंगा था.
बर्मा शेल कंपनी का आगे क्या हुआ?
शुरुआत में गाड़ियां कम होने और मानसून में ड्रमों में जंग लगने के कारण तेल का रिसाव (लीकेज) जैसी कई चुनौतियां थीं. इसके बावजूद कंपनी टिकी रही. साल 1976 में भारत सरकार ने बर्मा शेल का राष्ट्रीयकरण (Nationalization) कर दिया, जिससे ‘भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (BPCL) का जन्म हुआ. आज यही कंपनी देश भर में करीब 25,000 पेट्रोल पंप चला रही है.
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