Carbon Trading: भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से लड़ने के लिए एक अनोखा और व्यापारिक रास्ता निकाला है. अगले चार महीनों में देश में कार्बन सर्टिफिकेट की खरीद-बिक्री शुरू हो जाएगी. इसका मतलब है कि जो कंपनियां पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचाएंगी, उन्हें इसका आर्थिक फायदा मिलेगा.
क्या है यह कार्बन मार्केट और कैसे करेगा काम ?
सरकार हर बड़ी कंपनी के लिए प्रदूषण (Emissions) की एक सीमा तय करेगी.
फायदा किसे होगा? अगर कोई कंपनी अपनी तय सीमा से कम प्रदूषण करती है, तो उसे ‘कार्बन सर्टिफिकेट’ मिलेंगे. वह इन सर्टिफिकेट्स को बाजार में बेचकर पैसे कमा सकती है. नुकसान किसे होगा? जो कंपनियां तय सीमा से ज्यादा प्रदूषण करेंगी, उन्हें जुर्माना भरने के बजाय बाजार से ये सर्टिफिकेट खरीदने होंगे.
इस कदम के 3 बड़े फायदे
- नेट जीरो का लक्ष्य: भारत ने 2070 तक ‘नेट जीरो’ (प्रदूषण मुक्त) बनने का संकल्प लिया है. यह बाजार उस दिशा में सबसे बड़ा कदम है.
- कंपनियों में मची होड़: अब कंपनियां सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए नहीं, बल्कि कार्बन सर्टिफिकेट बचाने के लिए भी नई और साफ तकनीकों (जैसे सोलर पावर) का इस्तेमाल करेंगी.
- पुरानी स्कीम की सफलता: भारत में पहले से चल रही ‘PAT’ स्कीम ने करीब 11 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड कम करने में मदद की है. नया कार्बन मार्केट इसे और बड़े स्तर पर ले जाएगा.
आम आदमी और देश पर असर
ऊर्जा मंत्री के अनुसार, यह सिर्फ एक मार्केट नहीं बल्कि एक ‘नेशनल एसेट’ (राष्ट्रीय संपत्ति) है. इससे देश में नई तकनीक वाली नौकरियां आएंगी और भारत दुनिया भर में ‘ग्रीन एनर्जी’ का लीडर बनकर उभरेगा. साथ ही, 20 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने जैसे लक्ष्यों से बिजली की बर्बादी भी रुकेगी.
Also Read: मिडिल ईस्ट की जंग और आपकी जेब, क्या भारत में बढ़ेगी महंगाई? जानिए SBI की रिपोर्ट
