भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौता आज से हो जाएगा लागू, कई उत्पादों को मिलेगी ड्यूटी फ्री पहुंच

आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) पर इस साल दो अप्रैल को हस्ताक्षर किए गए थे. इससे 6,000 से अधिक व्यापक क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों को ऑस्ट्रेलिया के बाजार में बिना किसी शुल्क के पहुंच मिलेगी.

नई दिल्ली : भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंतरिम मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आज गुरुवार यानी 29 दिसंबर से लागू हो जाएगा. इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलियाई बाजार में हजारों भारतीय उत्पादों मसलन कपड़ा और चमड़े को बिना किसी शुल्क (ड्यूटी) के पहुंच उपलब्ध कराई जा सकेगी. निर्यातकों और उद्योग के जानकारों के अनुसार, इस समझौते से पांच साल में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 45-50 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा.

श्रम प्रधान क्षेत्रों को होगा फायदा

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) पर इस साल दो अप्रैल को हस्ताक्षर किए गए थे. इससे 6,000 से अधिक व्यापक क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों को ऑस्ट्रेलिया के बाजार में बिना किसी शुल्क के पहुंच मिलेगी. समझौते से श्रम प्रधान क्षेत्रों को अत्यधिक लाभ होगा. इनमें कपड़ा और परिधान, कुछ कृषि तथा मछली उत्पाद, चमड़ा, जूते, फर्नीचर, खेल के सामान, आभूषण, मशीनरी और बिजली के सामन शामिल हैं.

भारतीय निर्यातकों के लिए ऑस्ट्रेलिया प्रमुख बाजार

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के उपाध्यक्ष खालिद खान ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारतीय निर्यातकों के लिए प्रमुख बाजारों में से एक है. उन्होंने कहा कि यह समझौता लागू होने के पहले दिन से यानी 29 दिसंबर से हमारे लिए अपार अवसर उपलब्ध कराएगा.

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समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया पहले दिन से मूल्य के लिहाज से करीब 96.4 फीसदी निर्यात (मूल्य के आधार पर) शून्य-शुल्क पहुंच की पेशकश कर रहा है. इसमें कई ऐसे उत्पाद शामिल हैं, जिस पर वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया चार-पांच फीसदी का सीमा शुल्क लगाता है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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