Black Money: अब जरा ईमानदारी से बताइए, जब टीवी पर ‘ब्लैक मनी’ की खबर आती है, तो आपको भी लगता है कि ये बड़े-बड़े नेताओं, अफसरों, बिजनेसमैन की बात है. लेकिन क्या आपको पता है कि ब्लैक मनी आपके-हमारे जैसे आम लोगों की जेब में भी पल-बढ़ सकता है? चलिए, बड़ी-बड़ी परिभाषाओं में नहीं पड़ते, सीधा मुद्दे पर आते हैं.
ब्लैक मनी मतलब?
जैसे कोई बच्चा जेब खर्च मांगे और फिर वो पैसे छुपा ले – वैसे ही जब कोई इंसान अपनी कमाई छुपा लेता है ताकि टैक्स न देना पड़े, तो वो बन जाता है ब्लैक मनी. सरकार कहती है – “कमाई करो, टैक्स दो.” लेकिन लोग कहते हैं – “कमाई करेंगे, लेकिन टैक्स नहीं देंगे.” बस यहीं से पैदा होता है ब्लैक मनी.
कैसे बनता है ब्लैक मनी?
- मोहल्ले वाला डॉक्टर बोले – “कैश में दो, बिल की क्या ज़रूरत है?”
- दुकान वाला बोले – “UPI करोगे तो GST लग जाएगा, कैश दो.”
- किसी ने मकान बेचा, रजिस्ट्री में कम दाम दिखाया, बाकी कैश में ले लिया.
- अफसर साहब बोले – “काम करवा दूंगा, लेकिन थोड़ा ‘खर्चा पानी’ लगेगा.”
भाई साहब, ये सब छोटे-छोटे तरीके हैं ब्लैक मनी को जन्म देने के.
आम लोग भी बनाते हैं क्या ब्लैक मनी?
बिलकुल! आपने घर ट्यूशन पढ़ाया, दस-पंद्रह हज़ार कैश मिला और उसे टैक्स में नहीं दिखाया – हो गया ब्लैक मनी. फ्रीलांसिंग से कमाई की, बैंक में आया पैसा, लेकिन ITR में गायब – ब्लैक मनी. मतलब ये खेल सिर्फ अमीरों का नहीं है, हम जैसे लोगों का भी है.
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सरकार कैसे पकड़ती है?
अब सरकार भी जागरूक है.
– पैन-आधार लिंक,
– बैंक ट्रांजैक्शन की निगरानी,
– इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर,
– और हां, डिजिटल पेमेंट से बच नहीं सकते जनाब.
तो क्या करें?
- कैश से दूर रहें जितना हो सके.
- हर इनकम का हिसाब रखें.
- साल भर में एक बार ITR भरना सीख लें.
- “बिल दो भाई, सरकार को टैक्स चाहिए” वाली आदत डाल लें.
क्योंकि भाई, आज नहीं तो कल, सरकार आपकी जेब का एक्स-रे कर ही देगी.
और अगर उसमें निकला ‘काला धन’… तो फिर ‘रंगे हाथ’ पकड़े जाओगे
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