Gold Tax Rules: भारत में सोना सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की बचत और इनवेस्टमेंट का भी बड़ा जरिया है. कई लोग फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF में पैसा लगाते हैं, लेकिन टैक्स के नियमों की सही जानकारी नहीं होने की वजह से बाद में परेशानी उठानी पड़ सकती है.
सोने पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह का सोना खरीदा है, कितने समय तक अपने पास रखा है और बेचते समय कितना मुनाफा हुआ है. अगर आप भी सोने में इन्वेस्ट करने की सोच रहे हैं या परिवार में सोना ट्रांसफर करने वाले हैं, तो ये नियम जानना बेहद जरूरी है.
कितने समय बाद बेचने पर कितना टैक्स?
अगर आपने सोना खरीदने के 24 महीने के भीतर बेच दिया, तो उस पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. इसका मतलब है कि जो मुनाफा होगा, वह आपकी कुल आय में जुड़ जाएगा और उसी हिसाब से आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा. वहीं अगर सोना 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा और उसके बाद बेचा, तो यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा. इस पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा. पहले यह दर 20 फीसदी थी, लेकिन अब इसे घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया है. इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता.
क्या टैक्स बचाने का भी रास्ता है?
अगर आपने सोना बेचकर लंबी अवधि का मुनाफा कमाया है, तो कुछ मामलों में टैक्स छूट मिल सकती है. इसके लिए उस रकम को नया रिहायशी घर खरीदने में लगाया जा सकता है. इसके अलावा कुछ तय बॉन्ड्स में इन्वेस्ट करके भी छूट का फायदा लिया जा सकता है. यह राहत आयकर कानून की धारा 54F और 54EC के तहत मिलती है.
NRI के लिए क्या नियम अलग हैं?
अगर आप एनआरआई हैं, तब भी भारत में फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड और पेपर गोल्ड में इन्वेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए आरबीआई और FEMA के नियम लागू होते हैं. हालांकि एनआरआई सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स में इन्वेस्ट नहीं कर सकते. टैक्स नियम लगभग भारतीय निवासियों जैसे ही हैं. 24 महीने के भीतर बेचने पर स्लैब रेट से टैक्स लगेगा, जबकि 24 महीने बाद बेचने पर 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा.
गिफ्ट या विरासत में मिले सोने पर क्या होगा?
अगर सोना परिवार के किसी सदस्य से गिफ्ट या विरासत में मिला है, तो उस पर टैक्स नहीं लगता. शादी में मिले गोल्ड गिफ्ट भी टैक्स फ्री होते हैं. लेकिन अगर किसी गैर-रिश्तेदार से 50 हजार रुपये से ज्यादा कीमत का सोना मिलता है, तो यह टैक्स के दायरे में आएगा. इसे ITR में ‘Income from Other Sources’ के तहत दिखाना जरूरी होता है.
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