Form 10F for NRI: अगर आप विदेश में रहकर भारत से रेंट, डिविडेंड या किसी बिजनेस के जरिए कमाई कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. भारत सरकार के नियमों के अनुसार, Form 10F अब आपकी मेहनत की कमाई बचाने का सबसे महत्वपूर्ण साधन बन गया है.
Form 10F भरना क्यों जरूरी है?
सरल शब्दों में कहें तो यह फॉर्म आपको Double Taxation (दोहरे टैक्स) से बचाता है. भारत का कई देशों के साथ ‘Tax Treaty’ (DTAA) समझौता है. अगर आप Form 10F भरते हैं, तो आप भारत में कम टैक्स (TDS) कटवा सकते हैं. अगर आप इसे नहीं भरते, तो आपकी कमाई पर सीधे 20% या उससे ज्यादा टैक्स कट सकता है, जो आपकी जेब पर भारी पड़ेगा.
किसे भरना होगा यह फॉर्म?
यह फॉर्म हर उस व्यक्ति या विदेशी कंपनी के लिए है जो भारत का निवासी नहीं है. लेकिन यहां से पैसा कमा रहा है. चाहे आप दुबई में बैठकर इंडिया से घर का किराया ले रहे हों, या कुवैत-ओमान में रहकर भारतीय कंपनी से डिविडेंड पा रहे हों, आपको यह फॉर्म जमा करना होगा. ध्यान रहे, जुलाई 2022 से इसे ऑनलाइन फाइल करना अनिवार्य कर दिया गया है.
कौन से डॉक्यूमेंट्स हैं जरूरी?
फॉर्म भरने के लिए आपको कुछ बेसिक डॉक्युमेंट्स चाहिए होंगे:
- TRC (Tax Residency Certificate): जिस देश में आप रह रहे हैं वहां का टैक्स सर्टिफिकेट.
- TIN (Tax Identification Number): विदेश का टैक्स नंबर.
- Passport: पहचान के तौर पर.
- Address Proof: विदेश का पता.
फॉर्म न भरा तो क्या होगा नुकसान?
अगर आप Form 10F जमा नहीं करते, तो टैक्स विभाग मान लेगा कि आप किसी संधि का लाभ नहीं लेना चाहते. ऐसे में बैंक या आपकी पेमेंट करने वाली पार्टी भारी TDS काट लेगी. इसके अलावा, बाद में रिफंड लेने में भी काफी चक्कर काटने पड़ सकते हैं और पेनल्टी का रिस्क भी रहता है.
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