DGFT Norms Committee Reforms: भारत सरकार ने देश के एक्सपोर्टर्स को एक बड़ी राहत दी है. मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के तहत काम करने वाली ‘नॉर्म्स कमेटियों’ (Norms Committees) के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं. इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ (Advance Authorisation) के लिए आने वाले आवेदनों का तेजी से निपटारा करना और एक्सपोर्ट की प्रक्रिया को सरल बनाना है.
सरकार का यह कदम ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है. मंत्रालय के अनुसार, अब एक्सपोर्टर्स को अपनी फाइलों के पास होने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
क्या है यह नई योजना और कैसे होगा फायदा?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, DGFT मुख्य रूप से दो बड़ी योजनाओं को संभालता है—एडवांस ऑथराइजेशन (AA) और ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट ऑथराइजेशन (DFIA). ये योजनाएं एक्सपोर्टर्स को उन कच्चे माल या इनपुट्स को बिना किसी टैक्स (Duty) के इंपोर्ट करने की अनुमति देती हैं, जिनका इस्तेमाल बाद में एक्सपोर्ट होने वाले सामान को बनाने में किया जाता है. अब तक अलग-अलग सेक्टरों के लिए कुल सात कमेटियां काम कर रही थीं, लेकिन एक्स्पर्ट्स की कमी और काम के बोझ के कारण बहुत सारे आवेदन पेंडिंग पड़े थे. सरकार ने अब नियम बनाया है कि हर 15 दिन में इन कमेटियों की बैठक अनिवार्य रूप से होगी और मीटिंग के तुरंत बाद फैसलों को लागू किया जाएगा.
कमेटियों में क्या बदलाव किए गए हैं?
पेंडिंग मामलों को खत्म करने के लिए सरकार ने दो स्तरों पर काम किया है: क्षमता और समय-सीमा.
- एक्स्पर्ट्स की संख्या बढ़ी: तकनीकी एक्स्पर्ट्स की संख्या 12 से बढ़ाकर अब 22 कर दी गई है. इससे अब ज्यादा फाइलों की जांच कम समय में हो सकेगी.
- पुराने मामलों को प्राथमिकता: जो आवेदन लंबे समय से अटके हुए हैं, उन्हें पहले निपटाया जा रहा है. इसके लिए एक ‘स्पेशल डिस्पोजल ड्राइव’ चलाई गई है, जिसमें पुरानी तारीखों के हिसाब से ट्रांसपेरेंट तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं.
क्या अब तक कोई सकारात्मक परिणाम दिखे हैं?
जी हां, मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इन सुधारों का असर दिखने लगा है. जनवरी 2026 से 7 अप्रैल 2026 के बीच ही कुल 38 बैठकें आयोजित की गईं. इन बैठकों में 3,925 मामलों की समीक्षा की गई और रिकॉर्ड 1,770 मामलों का पूरी तरह निपटारा कर दिया गया. यह रफ्तार पिछले सालों के मुकाबले काफी अधिक है.
छोटे व्यापारियों के लिए इसके क्या मायने हैं?
इन सुधारों का सबसे बड़ा फायदा छोटे और मध्यम स्तर के एक्सपोर्टर्स (SMEs) को मिलेगा. मंजूरी मिलने में लगने वाला समय कम होने से उनकी लागत घटेगी और व्यापार में अनिश्चितता खत्म होगी. जब एक्सपोर्ट से जुड़ी मंजूरियां समय पर मिलेंगी, तो भारतीय सामान इंटरनेशनल मार्केट में और भी प्रतिस्पर्धी बन पाएगा. सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि नियमों को इतना सरल बना देना कि एक्सपोर्टर्स का ध्यान पेपरवर्क के बजाय बिजनेस बढ़ाने पर रहे.
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