Delhi Electricity Bill Hike: दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए बिजली के बिलों में हुआ बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है. अब हर कंज्यूमर के मन में अभी एक ही सवाल है कि क्या मेरा बिजली का बिल बढ़ जाएगा है? हाल ही में पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) में जो बदलाव हुए हैं, उन्हें लेकर काफी कन्फ्यूजन है. दिल्ली के पावर मिनिस्टर आशीष सूद ने इस पर स्थिति साफ की है, जिससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपकी जेब पर इसका कितना असर होगा.
आखिर ये PPAC क्या है?
आसान भाषा में समझें तो PPAC का मतलब है कि बिजली खरीदने की लागत में बदलाव. देश के बिजली कानूनों के मुताबिक, जब बिजली बनाने में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल (जैसे कोयला या गैस) की कीमतें बढ़ती हैं, तो बिजली कंपनियां सरकार से उसकी भरपाई के लिए एक खास सरचार्ज वसूल सकती हैं. यह कोई नया चार्ज नहीं है, बल्कि दशकों से बिजली कानून का हिस्सा रहा है.
बिजली के दाम बढ़ने के पीछे असली वजह क्या है?
पावर मिनिस्टर आशीष सूद के मुताबिक, हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और दूसरे ग्लोबल फैक्टर्स से फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल आया है. पिछले महीने बहुत से सोर्सेस से बिजली खरीदने की औसत लागत में 31 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस बढ़ी हुई लागत के कारण ही PPAC को बढ़ाना पड़ा है.
कितना बढ़ा है बिजली का सरचार्ज?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार और रेगुलेटरी कमीशन (DRC) ने कंज्यूमर्स पर कम से कम बोझ डालने की कोशिश की है. यहां कुछ मुख्य आंकड़े दिए गए हैं:
- पुराना रेट: 31 मार्च तक यह सरचार्ज 14.5 प्रतिशत था.
- दबाव: फ्यूल की कीमतों में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी, जिसके हिसाब से यह सरचार्ज काफी ज्यादा बढ़ सकता था.
- नई दर: सरकार के हस्तक्षेप के बाद, इसे केवल 2.4 प्रतिशत बढ़ाया गया है.
- अब कितना लगेगा: अब यह सरचार्ज 14.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत के बीच हो गया है.
क्या आगे और बिल बढ़ेंगे?
दिल्ली सरकार का कहना है कि वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. मंत्री ने आश्वासन दिया है कि सरकार कंज्यूमर्स को महंगाई की मार से बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध (Committed) है. सरकार की कोशिश यह है कि इंटरनेशनल मार्केट में फ्यूल की कीमतें बढ़ने का असर दिल्ली के आम आदमी की जेब पर कम से कम पड़े.
फिलहाल सरकार ने जो बदलाव किए हैं, वे केवल फ्यूल की बढ़ती लागत को कवर करने के लिए हैं. आने वाले समय में जैसे ही ग्लोबल स्थिति में सुधार होगा और फ्यूल की कीमतें स्थिर होंगी, सरकार कंज्यूमर्स को राहत देने के लिए आगे के कदम उठाएगी. फिलहाल के लिए, यह बढ़ोत्तरी सीमित रखी गई है ताकि लोगों का बजट न बिगड़े.
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