Crude Oil: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में खलबली मचा दी है. युद्ध खत्म होने की अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं. ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर और अमेरिकी WTI क्रूड 91 डॉलर के पार निकल गया है. दुनिया भर के एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो तेल की कीमतें पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं.
क्या स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) है असली विलेन?
दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, जो फिलहाल लगभग बंद पड़ा है. ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर प्रोटेक्शन टैक्स लगाने की तैयारी में है. जानकारों का कहना है कि अगर यह सप्लाई लाइन पूरी तरह ठप रही, तो ब्रेंट क्रूड 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई संकट बताया है.
क्या बातचीत से सुलझेगा मामला?
अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसमें यूरेनियम भंडार खत्म करने और मिसाइल प्रोग्राम पर रोक जैसी शर्तें शामिल हैं. लेकिन ईरान का रुख कड़ा है. ईरान का कहना है कि वे झुकेंगे नहीं और उन्हें इस समुद्री रास्ते पर संप्रभु (sovereign) अधिकार चाहिए. दोनों देशों के बयानों में अंतर होने के कारण मार्केट में डर का माहौल है.
आपकी जेब पर क्या होगा असर?
भारत में भी इसका असर दिखने लगा है. MCX पर कच्चे तेल की कीमतें 8,511 रुपये के आसपास हैं. 26 मार्च को रामनवमी की छुट्टी के कारण सुबह का ट्रेड बंद है, लेकिन शाम को बाजार खुलते ही हलचल बढ़ने की उम्मीद है. अगर कच्चा तेल 120 डॉलर-150 डॉलर के स्तर पर पहुंचता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से महंगाई तेजी से बढ़ सकती है.
क्या तेल की कीमतें गिरेंगी या और बढ़ेंगी?
मैक्वेरी (Macquarie) और नुवामा जैसे बड़े ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि भले ही कल युद्ध रुक जाए, तब भी सप्लाई चेन को पटरी पर आने में वक्त लगेगा. ब्लैक रॉक (BlackRock) के मुताबिक, निवेशक अभी इस खतरे को कम आंक रहे हैं. आने वाले हफ्तों में 110 डॉलर से 140 डॉलर का स्तर देखना कोई बड़ी बात नहीं होगी.
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