Crude Oil Price: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है. बुधवार की सुबह इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई. इस राहत की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की फिर से उभरती उम्मीदें और मिडिल ईस्ट में कम होता तनाव माना जा रहा है.
तेल की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण राजनीतिक हलचल है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने इन्वेस्टर्स में नई उम्मीद जगाई है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों के भीतर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर कुछ बड़ा बदलाव हो सकता है. इसके अलावा, इजरायल और लेबनान के बीच भी सीधी बातचीत की खबरों ने बाजार को शांत किया है, जिससे तेल की सप्लाई रुकने का डर कम हो गया है.
बाजार में क्या रहे ताजा आंकड़े?
मंगलवार को बाजार काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. ब्रेंट क्रूड 94.42 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी तेल (WTI) की कीमतें भी गिरकर 87.08 डॉलर के स्तर को छू गईं. बुधवार सुबह तक ब्रेंट क्रूड 94.66 डॉलर और WTI 90.65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहे थे. एक्स्पर्ट्स का मानना है कि अगर शांति वार्ता सफल होती है, तो कीमतों में और भी कमी आ सकती है.
क्यों महंगा हो रहा है सोना?
एक तरफ जहां तेल सस्ता हो रहा है, वहीं सोने की चमक बढ़ गई है. बुधवार को न्यूयॉर्क के COMEX बाजार में सोना 0.8% की बढ़त के साथ 4,888 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की कमजोरी है. दरअसल, जब डॉलर की कीमत कम होती है, तो सोना खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है और कीमतें ऊपर चढ़ने लगती हैं.
भविष्य पर क्या होगा असर?
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं. यदि अगले 48 घंटों में ईरान के साथ परमाणु शर्तों पर कोई ठोस समझौता होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के नीचे भी जा सकती हैं. हालांकि, डॉलर और सोने का रिश्ता फिलहाल इन्वेस्टर्स के लिए मुनाफे का सौदा बना हुआ है.
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