ग्लोबल मार्केट में 45% उछला कच्चा तेल, फिर भी भारत में असर कम; जानें कैसे?

मार्च में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 3.4% हो गई है. राहत की बात यह है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 45% की बढ़त के बावजूद, भारत में इसका असर सरकारी दखल और एक्साइज ड्यूटी में कटौती के कारण अब तक सीमित रहा है.

Crisil Report: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ग्लोबल लेवल पर ऊर्जा की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है. मार्च में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 45% और प्राकृतिक गैस में 69% की भारी बढ़त दर्ज की गई. इसके बावजूद, भारत की रिटेल महंगाई (CPI) फरवरी के 3.2% से बढ़कर मार्च में केवल 3.4% तक ही पहुँची. क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आए इस ‘एनर्जी शॉक’ का घरेलू बाजार पर असर बहुत ही सीमित रहा है.

टैक्स कटौती और स्थिर कीमतें

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत में महंगाई को काबू में रखने में सरकारी हस्तक्षेप की बड़ी भूमिका रही है. वैश्विक स्तर पर तेल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को काफी हद तक स्थिर रखा गया.

इसके अलावा, मार्च के अंत में उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में की गई कटौती ने घरों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक दबाव को कम कर दिया. यही कारण है कि ‘कोर इन्फ्लेशन’ (Core Inflation) अभी भी 3.7% पर स्थिर बना हुआ है.

सब्जियां महंगी, पर दाल-चावल में राहत

खाने-पीने की चीजों के मोर्चे पर स्थिति थोड़ी मिली-जुली रही. जहाँ एक ओर अनाज और दालों की कीमतों में गिरावट (Deflation) जारी है, वहीं सब्जियों, मांस और खाद्य तेलों की महंगाई बढ़ी है. मसालों की बढ़ती कीमतों के कारण तैयार भोजन (Ready-made food) भी महंगा हुआ है. हालांकि, सोने और चांदी की वैश्विक कीमतों में सुधार और ‘हाई बेस इफेक्ट’ की वजह से समग्र महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिली.

भविष्य की चुनौतियां

क्रिसिल ने बताया है कि आने वाले समय में महंगाई के लिए मौसम एक बड़ी चुनौती बन सकता है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 के लिए ‘सामान्य से कम’ मानसून (92%) का अनुमान लगाया है. भीषण गर्मी के कारण कृषि पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे ‘फूड इन्फ्लेशन’ बढ़ने का खतरा बना हुआ है.

Also Read: सस्ती हुई चांदी, सोने की चमक भी पड़ी फीकी; जानिए आपके शहर में आज क्या हैं सोमवार के बंद भाव

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >