सस्ती बिजली बनेगी भारत के विकास की असली ताकत, वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का बड़ा बयान

India Economic Growth: भारत की आर्थिक वृद्धि का अगला चरण सस्ती और भरोसेमंद बिजली से तय होगा. वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के मुताबिक, एआई, डेटा सेंटर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे भविष्य के उद्योग ऊर्जा-निर्भर होंगे. उन्होंने कहा कि अगर भारत बिजली को अपनी आर्थिक रणनीति का केंद्र बनाता है, तो वह फ्यूचर-रेडी इकोनॉमी बन सकता है.

By KumarVishwat Sen | January 6, 2026 5:43 PM

India Economic Growth: सस्ती बिजली भारत के विकास की असली ताकत के तौर पर उभरकर सामने आ सकती है. वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने मंगलवार को कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण का निर्धारण सस्ती, भरोसेमंद और पर्याप्त बिजली से होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा सेंटर, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण जैसे भविष्य के उद्योग अत्यधिक ऊर्जा-निर्भर होंगे. ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह बिजली को अपनी आर्थिक रणनीति के केंद्र में रखे.

सस्ती बिजली बनेगी भारत के ग्रोथ का इंजन

मंगलवार को सोशल मीडिया के प्रमुख मंच एक्स (पुराना ट्विटर) पर अपने एक पोस्ट में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन ने लिखा है, ‘आने वाली अर्थव्यवस्थाएं केवल पूंजी या तकनीक से नहीं, बल्कि ऊर्जा की उपलब्धता से संचालित होंगी. एआई के दौर में डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर लगातार और भारी मात्रा में बिजली की मांग करेंगे. अगर बिजली सस्ती और स्थिर होगी, तभी भारत इन क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन पाएगा.’ उन्होंने लिखा कि सस्ती बिजली से न केवल उद्योगों की लागत घटेगी, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और निर्यात को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा.

अमेरिका-चीन से सबक लेने की जरूरत

अनिल अग्रवाल ने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच बढ़ते संबंध पर जोर देते हुए अमेरिका और चीन की तुलना की. उन्होंने कहा कि भले ही चीन की अर्थव्यवस्था अमेरिका से छोटी है, लेकिन उसकी बिजली उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी है. यह दीर्घकालिक निवेश आज एआई युग में चीन के लिए बड़ा रणनीतिक लाभ साबित हो रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका पहले ही बिजली की कमी के शुरुआती संकेत देख रहा है, क्योंकि एआई और डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बिजली महंगी और सीमित होती जा रही है. यह असंतुलन भविष्य में औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को गहराई से प्रभावित कर सकता है.

निर्णायक मोड़ पर खड़ा है भारत

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां सही फैसले उसे भविष्य की अर्थव्यवस्था का नेता बना सकते हैं. भारत के पास पारंपरिक ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोतों और मजबूत पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क का अनूठा संयोजन मौजूद है. अगर भारत समय रहते घरों, कारखानों और डेटा सेंटरों के लिए विश्वसनीय और किफायती बिजली सुनिश्चित करता है, तो वह खुद को एक फ्यूचर-रेडी इकोनॉमी के रूप में स्थापित कर सकता है.

पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी जरूरी

उन्होंने सरकार और उद्योग जगत से बिजली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की अपील की. उनका कहना था कि भारत को उत्पादन, पारेषण और वितरण तीनों स्तरों पर एक साथ काम करना होगा. केवल नई उत्पादन क्षमता जोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्रिड आधुनिकीकरण, स्टोरेज सिस्टम और स्मार्ट ट्रांसमिशन नेटवर्क भी उतने ही जरूरी हैं. उन्होंने बिजली क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश को आर्थिक नीति का प्राथमिक लक्ष्य बनाने पर जोर दिया.

आसान प्रक्रिया से खुलेगा निवेश का रास्ता

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन ने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को जोड़ने वाली एक सरल, एकीकृत और स्पष्ट नीति की वकालत की. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जटिल प्रक्रियाएं और अनुमतियों में देरी परियोजनाओं की गति को धीमा कर देती हैं. यदि कंपनियों को एंड-टू-एंड नीति समर्थन मिले, तो वे बड़े पैमाने पर निवेश कर तेजी और दक्षता के साथ परियोजनाएं पूरी कर सकती हैं. इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ेगी और बिजली क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा.

सस्ती बिजली वाले देश बनेंगे मैन्युफैक्चरिंग सेंटर

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई-संचालित अर्थव्यवस्थाओं में ऊर्जा ही असली प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त तय करेगी. जिन देशों के पास सस्ती और सुरक्षित बिजली होगी, वहीं डेटा, मैन्युफैक्चरिंग और खनिज प्रसंस्करण के वैश्विक केंद्र बनेंगे. उन्होंने कहा कि किफायती और सुरक्षित बिजली ही भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को परिभाषित करेगी.

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आज के फैसले तय करेंगे कल का भारत

अनिल अग्रवाल ने कहा कि आज किए गए निर्णायक सुधार भारत को एआई-ड्रिवन भविष्य में अग्रणी भूमिका दिला सकते हैं. अगर बिजली को विकास की रीढ़ बनाया गया, तो भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक निवेश और हाई-टेक इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र भी बन सकता है.

भाषा इनपुट के साथ

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