निर्मला सीतारमण ने दिया पाई-पाई का हिसाब, कहां से आता है पैसा और किधर होता है खर्च

Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में सरकार की कमाई और खर्च का पाई-पाई का हिसाब दिया है. 1 रुपये में कितना पैसा कहां से आता है और कहां खर्च होता है. सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत उधारी, इनकम टैक्स, जीएसटी और कॉरपोरेट टैक्स हैं, जबकि खर्च का बड़ा हिस्सा राज्यों को हस्तांतरण, ब्याज भुगतान, रक्षा और सब्सिडी में जाता है.

Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को वित्त वर्ष 2025-26 का आम बजट संसद में पेश कर दिया है. इस साल के बजट में उन्होंने मिडिल क्लास, सैलरीड पर्सन, वरिष्ठ नागरिक, छोटे उद्यमियों, विद्यार्थियों और सभी वर्ग के लोगों को कुछ न कुछ देने का ही काम किया. उनके बजट ऐलान से सभी वर्ग के लोग गदगद दिखाई दे रहे हैं. हर आदमी सरकार की साहखर्ची पर वाह-वाह कर रहा है. लेकिन यह कोई नहीं जानता कि सरकार देश की जनता पर जो पैसा खर्च करती है, वह आता कहां से है? आप यह जानकर हैरान होंगे कि वित्त मंत्री ने सरकार की आमदनी और खर्च का पाई-पाई का हिसाब दे दिया है कि 1 रुपये में कितना पैसा कहां से आता है और किधर खर्च होता है.

कहां से आता है पैसा

वित्त मंत्री ने लगातार अपने आठवें आम बजट में सरकार के आमद-खर्च का जो 1 रुपये का हिसाब दिया है, उस 1 रुपये की कमाई में सबसे अधिक 24 पैसा उधारी और अन्य जिम्मेदारियों से आता है. इसके बाद 22 पैसा इनकम टैक्स, 18 पैसा जीएसटी और दूसरे टैक्स, 17 पैसा कॉरपोरेट टैक्स, 9 पैसा गैर-कर प्राप्तियां, 5 पैसा केंद्रीय उत्पाद शुल्क, 4 पैसा सीमा शुल्क और 1 पैसा गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों से आता है.

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किधर जाता है पैसा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार को होने वाली आमद के बारे में बताया है, तो उन्होंने खर्च के बारे में पूरा हिसाब दिया है. उन्होंने बताया है कि सरकार 1 रुपये की होने वाली आमदनी में से 22 पैसा टैक्स और शुल्कों में राज्यों को उनकी हिस्सेदारी के रूप में भुगतान करती है. इसके अलावा, 20 पैसा ब्याज के भुगतान में करती है, 16 पैसा केंद्रीय क्षेत्र योजना (रक्षा पर पूंजीगत व्यय और सब्सिडी को छोड़कर), 8 पैसा रक्षा, 8 पैसा वित्त आयोग और अन्य स्थानान्तरण, 8 पैसा केंद्रीय योजना, 4 पैसा पेंशन, 6 पैसा सब्सिडी और 8 पैसा अन्य मदों में खर्च किया जाता है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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