Asian Share Markets Crash: सोमवार की सुबह एशियाई शेयर बाजारों के लिए भारी गिरावट लेकर आई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है. जापान के Nikkei 225 में 5% और दक्षिण कोरिया के KOSPI में 4% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. ताइवान और सिंगापुर के बाजार भी इस बिकवाली के दबाव से नहीं बच पाए. बाजार में मची इस खलबली के पीछे तेल की सप्लाई रुकने का डर सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है.
क्या कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी?
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत अब 115.61 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव को अब एक महीना पूरा हो चुका है, जिसमें अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे देश आमने-सामने हैं. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते को प्रभावित करने से शिपिंग कंपनियों ने अपनी आवाजाही रोक दी है. एक्स्पर्ट्स का मानना है कि अगर ऊर्जा सप्लाई इसी तरह बाधित रही, तो पूरी दुनिया में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का खतरा और गहरा हो जाएगा.
क्या ये 2008 जैसा बड़ा संकट है?
मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने चेतावनी दी है कि ये स्थिति साल 2008 की महामंदी और डॉट कॉम क्रैश की याद दिलाती है. उनके अनुसार, दुनिया इस वक्त एक साथ तीन बड़े संकटों से जूझ रही है:
- फंड्स का रुकना: कई निवेश फंड्स ने निवेशकों का पैसा वापस करने पर रोक लगा दी है.
- कर्ज का बोझ: रिकॉर्ड कर्ज और बढ़ती महंगाई के कारण बॉन्ड मार्केट जोखिम को संभाल नहीं पा रहे हैं.
- ऊर्जा संकट: इसे इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बताया जा रहा है, जिसका फिलहाल कोई हल नजर नहीं आ रहा.
संयुक्त राष्ट्र की क्या है तैयारी?
बढ़ते संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है. यह टीम स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर काम करेगी. UN ने आगाह किया है कि अगर ये समुद्री रास्ता बंद रहा, तो दुनिया भर में अनाज और जरूरी मानवीय मदद की सप्लाई रुक सकती है, जिससे भुखमरी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
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