कोलकाता : गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र में खड़े संकट की आंच वित्तीय क्षेत्र के अलावा रीयल एस्टेट कारोबार पर भी आ सकती है. आईएलएंडएफएस के कर्ज भुगतान में चूक से एनबीएफसी क्षेत्र संकट से जूझ रहा है. रीयल एस्टेट कारोबार के संबंध में परामर्श देने वाली फर्म एनारॉक कैपिटल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी शोभित अग्रवाल ने कहा कि मार्च 2018 तक एनबीएफसी कंपनियों का रीयल एस्टेट क्षेत्र को दिया गया कर्ज कुल कर्ज का 7.5 फीसदी यानी 1.65 लाख करोड़ रुपये था.
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उन्होंने कहा कि गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के बढ़ते बोझ के चलते बैंकिंग प्रणाली ने रीयल एस्टेट क्षेत्र के वित्तपोषण को रोक दिया है. नकदी की कमी का सामना कर रहे डेवलपरों के लिए एनबीएफसी और एचएफसी पूंजी का प्रमुख स्रोत है. अग्रवाल ने कहा कि एनबीएफसी क्षेत्र के संकट को जल्द से जल्द सुलझाना होगा, वरना रीयल एस्टेट क्षेत्र में होने वाला बहुप्रतीक्षित सुधार कुछ और तिमाहियों के लिये टल जायेगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां नकदी संकट का सामना कर रही हैं. उनके डेवलपरों को ऋण वितरण में काफी कमी आयी है.
आंकड़ों के मुताबिक, एनबीएफसी कंपनियों को अक्टूबर-दिसंबर अवधि में कमर्शियल पेपर से संबंधित 1.2 लाख करोड़ रुपये चुकाने हैं. अगस्त-अक्टूबर में यह आंकड़ा 1.46 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर था.
