Govindganj Vidhansabha: गोविंदगंज के लोगों ने हर बार बदली अपनी पसंद, BJP के सामने सीट बचाने की चुनौती

Govindganj Vidhansabha: गोविंदगंज सीट सामाजिक और जातीय संतुलन के लिहाज से यह सीट हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए चुनौतीपूर्ण रही है. कृषि प्रधान इस क्षेत्र में विकास, सड़क, सिंचाई और रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा से चुनावी बहस का केंद्र रहे हैं.

Govindganj Vidhansabha: पूर्वी चंपारण जिले की महत्वपूर्ण गोविंदगंज विधानसभा सीट बिहार की सियासत में एक अहम स्थान रखती है. पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में गोविंदगंज सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. एनडीए गठबंधन की ओर से बीजेपी ने प्रत्याशी उतारा था, जबकि महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने जोरदार टक्कर दी थी. अंततः यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में गई. भाजपा के सुनील मणि त्रिपाठी ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया. 

बीजेपी की जीत के पीछे रहे ये कारण

इस जीत के पीछे बीजेपी की मजबूत संगठनात्मक पकड़, केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं और स्थानीय जातीय समीकरणों का संतुलन महत्वपूर्ण कारक साबित हुए थे. खासकर यादव, कुशवाहा, वैश्य और दलित वोटों में हुए बंटवारे ने बीजेपी को लाभ पहुंचाया. अब जब 2025 का चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है, तो सभी प्रमुख दल इस सीट पर फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति में जुट गए हैं. 

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लगातार दो बार नहीं चुना गया कोई भी उम्मीदवार 

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो गोविंदगंज एक बार फिर हॉट सीट बनने जा रही है, जहां उम्मीदवारों को न केवल संगठनात्मक ताकत दिखानी होगी, बल्कि स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ भी रखनी होगी. इसके पीछे कारण है कि यहां के लोगों ने हर बार अपनी पसंद को बदला और पिछले 4 चुनाव से यहां किसी भी विधायक ने लगातार दो बार जीत नहीं दर्ज कर पाये हैं.

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लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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